बेंगलुरु ,22  फरवरी। कर्नाटक सरकार राज्य में 16 साल से कम उम्र के छात्रों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की एक बड़ी योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। छात्रों में तेजी से बढ़ती सोशल मीडिया की लत और नशीली दवाओं के संपर्क में आने के खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। इस अहम मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ चर्चा की और उनसे इस प्रस्तावित प्रतिबंध पर उनकी राय मांगी है। मुख्यमंत्री ने छात्रों के व्यवहार, उनकी शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर मोबाइल फोन के पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
विदेशी तर्ज पर कड़े कदम उठाने की तैयारी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कुलपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज बच्चे सोशल मीडिया के प्रति जुनूनी हो गए हैं, जो उनके सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मोबाइल के माध्यम से बच्चे नशीली दवाओं के जाल में भी आसानी से फंस रहे हैं। सीएम ने ऑस्ट्रेलिया समेत कई अन्य देशों का उदाहरण दिया, जिन्होंने पहले ही छात्रों के लिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने जैसे सख्त कदम उठाए हैं। सरकार का मानना है कि मोबाइल फोन के अनियंत्रित इस्तेमाल से छात्रों के आचरण पर बुरा असर पड़ रहा है।
शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया के बाद लिया जाएगा अंतिम फैसला
कर्नाटक सरकार अन्य देशों की तर्ज पर ही नाबालिग छात्रों को मोबाइल से दूर रखकर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करना चाहती है। इसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए कैंपस में नाबालिग छात्रों के मोबाइल इस्तेमाल पर बैन लगाने पर विचार चल रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि चूंकि कुलपति शिक्षा के क्षेत्र की गहरी और व्यावहारिक समझ रखते हैं, इसलिए इस नई नीति को लागू करने में उनकी राय एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल सरकार अब इन शिक्षा विशेषज्ञों की विस्तृत प्रतिक्रिया और सुझावों का इंतजार कर रही है, जिसके आधार पर ही इस दिशा में कोई अंतिम और ठोस फैसला लिया जाएगा।

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