न्यूयॉर्क ,25 जनवरी। यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफ़टीए) पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंचने की खबरों के बीच अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने शुक्रवार को कहा कि रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को हटाने की गुंजाइश है, क्योंकि भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह से बंद कर दी है। उन्होंने भारत पर लगाए गए इन प्रतिबंधों को अमेरिका की सफलता बताया।
बेसेंट ने एक साक्षात्कार में कहा, हमने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए थे। अब भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद हो चुकी है। यह एक बड़ी सफलता है। रूसी तेल पर 25 प्रतिशत टैरिफ अभी भी लागू हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें हटाने की गुंजाइश है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने के कारण शामिल है। इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव देखने को मिला है।
बेसेंट ने इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए कहा कि यूरोप ने भारत पर टैरिफ लगाने से इनकार किया, क्योंकि वह भारत के साथ एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना चाहता था। उन्होंने यूरोप को दिखावटी सहयोगी करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले भारत की रिफाइनरियों में रूसी तेल की हिस्सेदारी केवल दो से तीन प्रतिशत थी, जो बाद में बढ़कर 17 से 19 प्रतिशत तक पहुंच गई। उनके अनुसार, सस्ते दामों पर रूसी तेल खरीदकर भारतीय रिफाइनरियों ने भारी मुनाफा कमाया।
बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देशों ने भारत में रिफाइन किए गए रूसी तेल उत्पादों को खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से रूस के युद्ध को वित्त पोषित किया। उन्होंने इसे बेवकूफी भरा कदम बताया। इस बीच, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी होने की संभावना है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी कांग्रेस में एक विधेयक पर चर्चा चल रही है, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत इस विधेयक से अवगत है और पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। बेसेंट ने यह भी कहा कि अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से व्यवस्थित कर रहा है। टैरिफ से अरबों डॉलर की आय हो रही है और विनिर्माण व फैक्ट्रियों की अमेरिका वापसी हो रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप अप्रैल में बीजिंग का दौरा करेंगे, जबकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गर्मियों में अमेरिका आ सकते हैं। संभावना है कि इस वर्ष दोनों नेता चार बार मुलाकात कर सकते हैं।

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