नई दिल्ली ,22 जनवरी । देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर में लगातार बिगड़ते प्रदूषण के स्तर पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सर्वोच्च अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अगले 4 हफ्तों के भीतर अपना ‘एक्शन प्लान पेश करें। कोर्ट ने दो टूक कहा है कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा सुझाए गए 15 लॉन्ग टर्म (दीर्घकालिक) उपायों को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए। इन उपायों में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने से लेकर मेट्रो विस्तार और नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति जैसे अहम कदम शामिल हैं।
तीन जजों की बेंच ने दिया अल्टीमेटम
बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अन्य सभी संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि दिल्ली-एनसीआर में गिरते एयर क्वालिटी इंडेक्स को सुधारने के लिए ष्ट्रक्तरू के उपायों पर आधारित कार्ययोजना चार सप्ताह के अंदर कोर्ट के समक्ष रखी जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब इन सिफारिशों पर किसी भी तरह की आपत्ति या बहानेबाजी पर विचार नहीं किया जाएगा।
मेट्रो विस्तार और पुरानी गाड़ियां हटाने पर जोर
सुनवाई की शुरुआत में ष्ट्रक्तरू की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने आयोग की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि प्रदूषण पर काबू पाने के लिए आयोग ने विस्तृत दीर्घकालिक उपाय तैयार किए हैं। इन उपायों में सबसे प्रमुख दिल्ली-एनसीआर से उत्सर्जन के आधार पर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है। इसके अलावा, ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल व्यवस्था को और सख्त बनाने, रेल और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करने और संशोधित इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लागू करने पर जोर दिया गया है।
डेडलाइन तय करने की मांग, फंड पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि इसी तरह के कदम पिछली योजनाओं में भी सुझाए गए थे, लेकिन वे पूरी तरह लागू नहीं हो पाए। इसलिए माननीय अदालत को इन सिफारिशों के लिए एक सख्त ‘डेडलाइन तय करनी चाहिए। इस पर एएसजी भाटी ने कोर्ट को बताया कि उन एजेंसियों की पहचान कर ली गई है जो इन उपायों को लागू करने के लिए पर्यावरण मुआवजा शुल्क फंड मुहैया कराएंगी।
क्चस्-ढ्ढङ्क गाड़ियों पर अब होगी सीधी कार्रवाई
इस सुनवाई का सबसे बड़ा असर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाली पुरानी गाड़ियों पर पड़ने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने 12 अगस्त के अंतरिम आदेश में बदलाव करते हुए अधिकारियों को बड़ा अधिकार दे दिया है। अब अधिकारी उन पुरानी गाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेंगे जो भारत स्टेज-ढ्ढङ्क (क्चस्-4) मानकों को पूरा नहीं करती हैं। कोर्ट के इस आदेश से साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में दिल्ली में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती और ज्यादा बढ़ने वाली है।
