डाo एम ए तोमर
मुज़फ्फरनगर।भाई-दूज के पावन अवसर पर गुरुवार को मुज़फ्फरनगर जिला कारागार में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला।जेल की ऊंची दीवारों के भीतर भी भाई-बहन के स्नेह और पवित्र रिश्ते की मिठास गूंज उठी।सैकड़ों बहनें अपने बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं तो कई की आंखें नम हो गईं।बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया आरती उतारी और लंबी उम्र की कामना की।वहीं भाइयों ने भी बहनों की कुशलक्षेम पूछी और रक्षा का वादा निभाने का संकल्प दोहराया।लंबे समय बाद हुए इस मिलन के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।सुबह से ही जेल परिसर में बहनों की भीड़ जुटने लगी थी।कई बहनें व्रत रखकर पहुंचीं और भाई को टीका करने के बाद ही व्रत खोला।कारागार प्रशासन ने त्योहार को सहज और सुरक्षित रूप से संपन्न कराने के लिए विशेष प्रबंध किए थे।जेल अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि बहनों को तिलक-सामग्री और मिठाई लाने की अनुमति दी गई थी।सुरक्षा के साथ-साथ सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया परिसर में टेंट,कुर्सियां और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई थी।बहनों के लिए चंदन की विशेष व्यवस्था कर पारंपरिक रूप से त्योहार मनाने का अवसर दिया गया।सख्त सुरक्षा घेरे के बावजूद भाई-बहन के इस भावनात्मक मिलन ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।भाई-दूज का यह पर्व एक बार फिर यह साबित कर गया कि स्नेह और रिश्तों की डोर किसी दीवार या बंदिश से नहीं टूटती।
मुज़फ्फरनगर।भाई-दूज के पावन अवसर पर गुरुवार को मुज़फ्फरनगर जिला कारागार में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला।जेल की ऊंची दीवारों के भीतर भी भाई-बहन के स्नेह और पवित्र रिश्ते की मिठास गूंज उठी।सैकड़ों बहनें अपने बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं तो कई की आंखें नम हो गईं।बहनों ने अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया आरती उतारी और लंबी उम्र की कामना की।वहीं भाइयों ने भी बहनों की कुशलक्षेम पूछी और रक्षा का वादा निभाने का संकल्प दोहराया।लंबे समय बाद हुए इस मिलन के दौरान भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।सुबह से ही जेल परिसर में बहनों की भीड़ जुटने लगी थी।कई बहनें व्रत रखकर पहुंचीं और भाई को टीका करने के बाद ही व्रत खोला।कारागार प्रशासन ने त्योहार को सहज और सुरक्षित रूप से संपन्न कराने के लिए विशेष प्रबंध किए थे।जेल अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि बहनों को तिलक-सामग्री और मिठाई लाने की अनुमति दी गई थी।सुरक्षा के साथ-साथ सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया परिसर में टेंट,कुर्सियां और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई थी।बहनों के लिए चंदन की विशेष व्यवस्था कर पारंपरिक रूप से त्योहार मनाने का अवसर दिया गया।सख्त सुरक्षा घेरे के बावजूद भाई-बहन के इस भावनात्मक मिलन ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।भाई-दूज का यह पर्व एक बार फिर यह साबित कर गया कि स्नेह और रिश्तों की डोर किसी दीवार या बंदिश से नहीं टूटती।
