अजीम अख्तर
दैनिक मानव जगत
सहरानपुर/लखनऊ: नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर आज पूरा समाज चिंतित है, क्योंकि जरा सी लापरवाही किसी भी मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। अक्सर देखा गया है कि व्यस्तता या गैर-जिम्मेदारी के चलते स्कूल वैन, ऑटो या बस चालक मासूम बच्चों को स्कूल परिसर के बाहर या उनके घर से दूर सड़क पर अकेले ही छोड़ देते हैं। बच्चों की सुरक्षा में की जाने वाली इस तरह की कोताही और लापरवाही बेहद गंभीर मामला है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय को भांपते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन’ (WPL 1090) ने एक विशेष जन-जागरूकता मुहिम की शुरुआत की है, जिसके तहत अभिभावकों को न सिर्फ सतर्क रहने की सलाह दी गई है, बल्कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किया गया है।
प्रशासन का साफ तौर पर मानना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और स्कूल प्रबंधन की सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर कभी भी आपके संज्ञान में यह बात आती है कि आपके बच्चे को वैन चालक द्वारा असुरक्षित तरीके से या बिना किसी जिम्मेदारी के अकेला छोड़ दिया गया है, तो आपको बिना किसी देरी के तुरंत कड़े कदम उठाने होंगे।
ऐसी स्थिति में सबसे पहला और जरूरी कदम यह है कि आप इस पूरी घटना की जानकारी तुरंत संबंधित स्कूल प्रशासन और स्कूल प्रबंधन को दें। स्कूल की यह वैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों के आने-जाने के परिवहन साधनों की निगरानी करें। इसके साथ ही, अभिभावकों को चाहिए कि वे उस लापरवाह वाहन संचालक या वैन ड्राइवर से सीधे तौर पर जवाब-तलब करें और उसे यह साफ शब्दों में चेतावनी दें कि ऐसी घोर लापरवाही दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि इसके बावजूद भी वाहन चालक के रवैये में कोई सुधार नहीं दिखता या मामला ज्यादा गंभीर प्रतीत होता है, तो अभिभावकों को बिना किसी हिचकिचाहट के कानून और पुलिस प्रशासन की सहायता लेनी चाहिए, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता।
इसके अलावा, पुलिस विभाग ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि सुरक्षा की इस लड़ाई में बच्चों को खुद भी मानसिक रूप से आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए माता-पिता को अपने बच्चों के साथ नियमित संवाद करना चाहिए और उन्हें खेल-खेल में आपातकालीन नंबरों को याद कराने की आदत डालनी चाहिए। बच्चों को यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि संकट के समय उन्हें किस नंबर पर और कैसे मदद मांगनी है।
किसी भी आपात स्थिति, असुरक्षा या शिकायत के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा चौबीसों घंटे चालू रहने वाले कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिन्हें हर अभिभावक को अपनी डायरी या मोबाइल फोन में हमेशा सुरक्षित रखना चाहिए। संकट के समय महिलाएं और बच्चियां तुरंत *महिला पावर लाइन 1090* पर संपर्क कर सकती हैं, वहीं किसी भी प्रकार की आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए *112* नंबर पर कॉल किया जा सकता है। इसके साथ ही, बच्चों से जुड़ी किसी भी समस्या, शोषण या सुरक्षा के मामले में *चाइल्ड हेल्पलाइन 1098* पर तुरंत सूचना दी जा सकती है।
अंत में, पुलिस प्रशासन और जागरूक समाज की ओर से यह अपील की जाती है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति हर नागरिक को अपनी आंखें और कान खुले रखने होंगे। यदि आपको सड़क पर, स्कूल के पास या कहीं भी कोई मासूम बच्चा संकट में, डरा हुआ या अकेला दिखाई दे, तो एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक का फर्ज निभाते हुए तुरंत आगे आएं, उसकी मदद करें और बिना समय गंवाए संबंधित पुलिस या हेल्पलाइन नंबरों को सूचित करें। आपका एक सजग कदम किसी मासूम की जिंदगी को सुरक्षित बना सकता है।
