हरिद्वार। यूरोप प्रवास के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार युवा आइकॉन डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने वैश्विक पटल पर भारत का गौरव बढ़ाया है।लंदन स्थित ब्रिटिश संसद के ऐतिहासिक परिसर में आयोजित श्पीस कॉन्क्लेवश् में उन्होंने नैतिक एआई और वैश्विक शांति का भविष्य विषय पर दुनिया के प्रतिष्ठित नीति-निर्धारकों,वैज्ञानिकों और विचारकों को संबोधित किया।सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ फाउंडेशन फॉर इंटरनेशनल लॉ (एफआई एल) के निदेशक लॉर्ड कृष रावल,आर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर (ओबीई) ने किया।लॉर्ड रावल ने एआई और अध्यात्म के अनूठे संवाद को भविष्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया और साउथ एशियाई इंस्टिट्यूट फॉर पीस एंड रेकन्सीलिएशन (एसएआईपीआर) के प्रतिनिधि के रूप में डॉ.चिन्मय पण्ड्या की उपस्थिति को अत्यंत गौरवपूर्ण कहा।डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य श्री के वैज्ञानिक अध्यात्म के सिद्धांतों पर सम्बोधन देते हुए वैश्विक समुदाय को एक नई दिशा दी।उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति तब तक विनाशकारी है जब तक वह मानवीय संवेदनाओं और नैतिकता से न जुड़ी हो।डॉ.पण्ड्या ने आगाह किया कि भविष्य की सुरक्षा केवल गणितीय एल्गोरिदम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मनुष्य के भीतर नैतिक विवेक का जाग्रत होना अनिवार्य है।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित यूके एआई पॉलिसी लीड ओलिवर रिची ने सरकारी नीतियों के माध्यम से एआई को वैश्विक सुरक्षा का आधार बनाने पर जोर दिया।वहीं, ऑक्सफोर्ड मार्टिन एआई गवर्नेंस इनिशिएटिव के निदेशक प्रो.रॉबर्ट ट्रेजर ने एआई के सुरक्षित उपयोग और इसके गवर्नेंस पर तकनीकी व कूटनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। इरोज इंडस्ट्रीज के चेयरपर्सन मिस्टर किशोर लुल्ला और गुड फेथ पार्टनरशिप के संस्थापक लॉर्ड रसेल रूक(ओबीई) ने भी समाज पर एआई के सकारात्मक और नैतिक प्रभावों को साझा किया।इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न केवल शांतिकुंज की गरिमा को बढ़ाया है,बल्कि हरिद्वार की पावन धरा के आध्यात्मिक विचारों को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में स्थापित कर दिया है।कार्यक्रम के दौरान डॉ.चिन्मय पंड्या ने उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों को पूज्य गुरुदेव का युग साहित्य और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

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