पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जदयू के नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, और यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य था। मुख्यमंत्री भी आज विधान परिषद की सदस्यता का त्याग करेंगे। उन्हीं के इस्तीफा का पत्र लेकर एमएलसी संजय गांधी और हमलोग विधान परिषद आए हैं। सभापति आएंगे और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। ? ?नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद विधान परिषद की सदस्यता से उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हो गयी थी। ? ?
नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा गया था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता के रूप में निर्वाचित होने की थी , इस कारण उन्होंने यह निर्णय लिया। ? ?
नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। ? ?
नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री और जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार किए। ?साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने ‘सुशासन बाबू’ के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री रहते कई ऐसी योजनाएं बनाई, जिनकी चर्चा पूरे देश में हुई। शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे फैसले नीतीश कुमार ने लिए। ? ?

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *