नई दिल्ली ,13 फरवरी । भारत अपनी हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद  की बैठक में रूस से 288 नई स्-400 मिसाइलों की खरीद को मंजूरी दे दी गई है। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह निर्णय मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरने और देश की एयर डिफेंस क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस खरीद में 120 छोटी दूरी वाली और 168 लंबी दूरी वाली मिसाइलें शामिल होंगी, जिन्हें फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत खरीदा जाएगा।
पाकिस्तान की सीमाओं पर दिखा था स्-400 का खौफ
मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने स्-400 सिस्टम का जिस आक्रामकता से इस्तेमाल किया था, उसने पड़ोसी मुल्क के होश उड़ा दिए थे। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को मार गिराया था। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, जब भारत ने स्-400 का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 314 किलोमीटर की दूरी पर एक बड़े विमान को ढेर किया, तो पाकिस्तान में हड़कंप मच गया था। डर का आलम यह था कि पाकिस्तान ने अपने लगभग सभी ऑपरेशनल विमानों को भारत सीमा से हटाकर अफगानिस्तान और ईरान के पास वाले हवाई अड्डों पर भेज दिया था। अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात स्-400 की वजह से ही 9 और 10 मई को पाकिस्तानी वायुसेना ने उड़ान भरने की हिम्मत तक नहीं जुटाई थी।
जून और नवंबर में मिलेंगी और सिस्टम
नई खरीद के अलावा, भारत को रूस के साथ पहले से हुए समझौते के तहत दो और स्-400 सिस्टम इसी साल जून और नवंबर में मिलने वाले हैं। इसके साथ ही वायुसेना ने स्-400 की सुरक्षा और छोटी दूरी के खतरों से निपटने के लिए रशियन ‘पैंटसिर सिस्टम खरीदने का भी प्रस्ताव रखा है। यह सिस्टम ड्रोन और कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन हमलों को रोकने में बेहद कारगर माना जाता है।
राफेल समेत 3.60 लाख करोड़ के प्रस्ताव मंजूर
गुरुवार को हुई इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री ने कुल 3.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी  दी। इसमें राफेल फाइटर जेट, कॉम्बैट मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट की खरीद शामिल है। सरकार का जोर ‘मेक इन इंडिया पर है, जिसके तहत अधिकांश लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इसके अलावा एंटी-टैंक माइन्स (विभव), टैंकों और लड़ाकू वाहनों  के ओवरहाल और लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान क्क-8ढ्ढ की खरीद को भी हरी झंडी दिखाई गई है। रक्षा अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत अब इन प्रस्तावों पर कीमत को लेकर बातचीत होगी और अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति  द्वारा दी जाएगी।

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