नईदिल्ली,21 जनवरी। बांग्लादेश में चिंताजनक हालात को देखते हुए भारत ने अपने सभी राजनयिकों के परिवारों को वापस बुला लिया है। हालांकि, राजनयिक सभी मिशनों पर तैनात रहेंगे। केंद्र सरकार ने यह फैसला तब लिया है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं और वहां हालात तनावपूर्ण हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कहा जा रहा है कि सभी परिवार जनवरी के अंत तक भारत आ जाएंगे।
सूत्रों ने बताया कि भारत ने बांग्लादेश को ‘गैर-पारिवारिक’ राजनयिक तैनाती स्थल के रूप में दर्ज करने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि बांग्लादेश में तैनात होने वाले राजनयिक अब अपने पति-पत्नी और बच्चों समेत परिवार के अन्य सदस्यों को साथ नहीं ले जा सकेंगे। मंत्रालय ने गैर-परिवारिक मिशन की यह श्रेणी इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे कुछ तनावग्रस्त और अशांति देशों के लिए ही लागू की थी। अब इसमें बांग्लादेश भी शामिल हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के लिए यह फैसला 1 जनवरी, 2026 से लागू हो गया है और भारतीय अधिकारियों को सूचित किया गया है कि वे पति या पत्नी और बच्चों को जल्द भारत वापस भेंज दें। इसके अलावा अधिकारियों के बच्चे अभी बांग्लादेश के स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त 7 दिन का समय वापसी के लिए दिया गया है। बांग्लादेश में अभी कितने राजनयिकों के परिवार हैं, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका स्थित भारतीय दूतावास समेत चटगांव, खुलना, सिलहट और राजशाही में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास खुले रहेंगे और अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे। हालांकि, यहां काम करने वाले अधिकतर राजनयिकों ने अपने परिवारों को बेहद कम समय के नोटिस पर भारत भेज दिया है। बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार है। उनके आने के बाद दिल्ली के साथ ढाका के रिश्तों में कड़वाहट आई है।
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के बाद अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं के खिलाफ हमले बढ़ गए हैं। पिछले 7 महीने में 116 अल्पसंख्यकों की हत्या की गई है, जिसमें सबसे अधिक हिंदू है। इसके अलावा बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव भी होने हैं, जिससे तनाव बढ़ने की आशंका है। संभावना है कि भारत ने खुफिया जानकारी के आधार पर यह फैसला लिया हो। पिछले दिनों बांग्लादेश में तनाव के दौरान कई भारतीय उच्चायोग कार्यालयों पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में खटास बढ़ने के बाद यह फैसला लिया गया है, जबकि अमेरिका 10 साल से ऐसा कर रहा है। वर्ष 2016 में ढाका में होली ऑर्टिसन बेकरी पर आतंकी हमले के बाद से अमेरिका ने राजनयिक परिवारों को नहीं भेजा है।

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