नई दिल्ली ,20 जनवरी । त्योहारों के सीजन में हवाई किराए में बेतहाशा बढ़ोतरी कर आम जनता की जेब काटने वाली एयरलाइन कंपनियां अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर आ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों के दौरान हवाई किराए में होने वाली भारी वृद्धि पर गहरी चिंता जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एयरलाइन कंपनियों द्वारा की जाने वाली इस मनमानी को यात्रियों का स्पष्ट शोषण करार दिया है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (ष्ठत्रष्ट्र) से जवाब तलब किया है और साफ कर दिया है कि कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप जरूर करेगा।
कुंभ और अन्य त्योहारों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एयरलाइन्स द्वारा किराए में किया गया अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव चिंताजनक है। बेंच ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे निश्चित रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे। कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुंभ मेले और अन्य त्योहारों के दौरान यात्रियों का किस तरह शोषण हो रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। जजों ने दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर जाने वाली फ्लाइट्स के किराए में हुई भारी बढ़ोतरी का विशेष रूप से जिक्र किया। जस्टिस संदीप मेहता ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि भले ही अहमदाबाद के किराए में बढ़ोतरी न हुई हो, लेकिन जोधपुर और अन्य जगहों के लिए किराए आसमान छू रहे हैं।
23 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कुछ समय की मांग की है। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी की तारीख तय की है। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने याचिका दायर कर नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और एक स्वतंत्र नियामक की स्थापना की मांग की है। इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने पिछले साल भी केंद्र सरकार, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी किया था।
बैगेज नियम और रेगुलेशन की कमी पर सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने एयरलाइन्स की मनमानी के कई अन्य पहलू भी रखे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि एयरलाइन्स ने बिना किसी ठोस कारण के इकोनॉमी क्लास में फ्री चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलो से घटाकर 15 किलो कर दिया है। यह कदम पहले से टिकट की कीमत में शामिल सर्विस को अलग से कमाई का जरिया बनाने जैसा है। इसके अलावा, चेक-इन के लिए सिर्फ एक बैग की अनुमति देना और कम सामान ले जाने वाले यात्रियों को कोई छूट न देना भेदभावपूर्ण है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि वर्तमान में किसी भी प्राधिकरण के पास हवाई किराए को नियंत्रित करने की शक्ति नहीं है। रेगुलेशन के अभाव में अमीर लोग तो पहले से टिकट बुक कर लेते हैं, लेकिन गरीब और आपातकालीन स्थिति में यात्रा करने वाले लोग इस ‘लूट का शिकार बनते हैं।

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