नई दिल्ली ,11 जनवरी। राजधानी दिल्ली में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपती को करीब 15 दिनों तक तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट में रखकर उनसे 14.85 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पीड़ितों की पहचान डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है।
दोनों डॉक्टरों ने लगभग 48 वर्ष अमेरिका में बिताए थे और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े कार्यों में अपनी सेवाएं दी थीं। सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 2015 में वे भारत लौटे थे और तब से समाजसेवा व चैरिटी कार्यों में सक्रिय थे।
गिरफ्तारी की धमकी देकर बनाया शिकार
पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुई, जब दंपती को फोन कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को कानून लागू करने वाली एजेंसियों का अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी वारंट और फर्जी आपराधिक मामलों की धमकी दी। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए और क्करूरु्र जैसे कानूनों का हवाला देकर दंपती को मानसिक रूप से डराया।
वीडियो कॉल के जरिए 15 दिन तक निगरानी
24 दिसंबर से 10 जनवरी की सुबह तक ठगों ने लगातार वीडियो कॉल के जरिए दंपती पर नजर रखी। पुलिस इस पूरे तरीके को ‘डिजिटल अरेस्ट बता रही है। इस दौरान ठगों ने दबाव बनाकर डॉ. इंदिरा तनेजा से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई। कभी 2 करोड़ तो कभी 2.10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजवाई गई। इस तरह आठ अलग-अलग खातों में कुल 14.85 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए।
बैंक जाने से पहले रटवाई जाती थी कहानी
77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा ने पुलिस को बताया कि ठग उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते थे। जब भी वह घर से बाहर निकलने या किसी से संपर्क करने की कोशिश करतीं, तो ठग तुरंत उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल शुरू कर देते थे। बैंक जाने से पहले उन्हें एक झूठी कहानी रटवाई जाती थी, ताकि जरूरत पड़ने पर बैंक कर्मचारियों को वही बताया जा सके। एक बार बैंक मैनेजर ने इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर को लेकर सवाल भी किया, लेकिन डर के कारण उन्होंने वही जवाब दिया, जो ठगों ने सिखाया था।
पुलिस स्टेशन पहुंचते ही खुला राज
यह मामला 10 जनवरी को सामने आया, जब ठगों ने दंपती को नजदीकी पुलिस स्टेशन जाने को कहा। ठगों ने दावा किया कि अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  उनकी पूरी रकम वापस कर देगा और पुलिस को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई है। डॉ. इंदिरा तनेजा वीडियो कॉल पर रहते हुए ही पुलिस स्टेशन पहुंचीं और ठगों को थाने के स्॥ह्र से बात करने की अनुमति भी दे दी। बातचीत के दौरान कॉल करने वालों का पुलिसकर्मियों से बदतमीजी भरा रवैया देख अधिकारियों को शक हुआ, जिसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और साइबर ठगों की पहचान व पैसे की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी तरह की धमकी भरी कॉल या वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।

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