हरिद्वार। विश्व मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह का समापन शुक्रवार को देवसंस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में हुआ।इस अवसर पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन(एमओयू)पर हस्ताक्षर किए गए।इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थाएं मिलकर देशभर में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी के विरुद्ध व्यापक जनजागरण अभियान संचालित करेंगी।इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के दो हजार से अधिक स्वयंसेवकों एवं साधकों ने नशा मुक्त भारत के संकल्प के साथ विशाल जनजागरण रैली निकाली।शांतिकुंज से प्रारंभ हुई,यह रैली विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई देवसंस्कृति विश्वविद्यालय परिसर पहुँची,जहाँ जनसभा का आयोजन किया गया।रैली में युवाओं,महिलाओं,विद्यार्थियों एवं विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया।सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ.वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं,बल्कि पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है।इसे समाप्त करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि समाज की आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।अखिल विश्व गायत्री परिवार के साथ हुआ यह समझौता नशामुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि नशा मुक्ति की शुरुआत व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास की चिंगारी प्रज्वलित करने से होती है।उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार,समाज,राज्य और राष्ट्र को नशे जैसी सामाजिक बुराई से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।डॉ.पण्ड्या ने कहा कि भारत की महान सांस्कृतिक परंपराएँ संयम,सदाचार और आत्मानुशासन की प्रेरणा देती हैं।आज हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि व्यसन की गिरफ्त में आए करोड़ों लोगों को नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करें और उनमें स्वस्थ,सकारात्मक एवं राष्ट्रनिर्माण की भावना का संचार करें।उन्होंने स्वयं नशा न करने तथा कम से कम एक व्यक्ति को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लेने हेतु प्रेरित किया।परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने दुर्व्यसन से दूर रहने हेतु अपील की।उल्लेखनीय है कि युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों से प्रेरित होकर अखिल विश्व गायत्री परिवार विगत कई दशकों से नशा-मुक्ति,नैतिक जागृति,युवा सशक्तिकरण और सामाजिक पुनर्निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चला रहा है।लाखों समर्पित स्वयंसेवकों के माध्यम से,जीवन के सकारात्मक मूल्यों का संदेश देश भर के गांवों, कस्बों और शिक्षण संस्थानों तक पहुँचाया जा रहा है।इस अवसर पर हुए समझौता ज्ञापन में अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से शांतिकुंज के व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि,वीरेन्द्र तिवारी,उदय किशोर मिश्र ने हस्ताक्षर किए,जबकि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्ताक्षर किया।कार्यक्रम में राज्य के उच्च शिक्षामंत्री डॉ.धनसिंह रावत,अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के संयुक्त सचिव संदीप राठौड,विभिन्न विभागों के अधिकारी,देवसंस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज परिवार सहित देशभर से आए प्रतिनिधि,विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।सभी ने संकल्प लिया कि जन-जागरण,संस्कार निर्माण और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से भारत को नशामुक्त बनाने के इस राष्ट्रीय अभियान को जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।
