हरिद्वार। बूंद को सागर बना दें,सागर को बाल्टी में रखने की कोशिश न करें यह उदगार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर सुधीर कुमार आर्य ने प्रोजेक्ट लेखन तथा अनुदान प्रदत्त संस्थाओं की उपयोगिता विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान के अवसर पर व्यक्त किए।ज्ञात हो कि शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निर्देशन में आयोजित इस विशेष व्याख्यान का उद्देश्य नवाचार तथा शोध से जुड़े शिक्षकों तथा शोधार्थियों को प्रोजेक्ट लेखन तथा अनुदानित संस्थाओं के साथ सामंजस्य स्थापन में होने वाली व्यवहारिक समस्याओं के निस्तारण से अवगत कराया। समविश्वविद्यालय के अतिथि गृह सभागार कक्ष में आयोजित इस विशेष व्याख्यान में शोध तथा प्रोजेक्ट से जुड़े विभिन्न शिक्षकों तथा छात्रों ने प्रतिभाग किया। शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डा.सुहास ने बताया कि समविश्वविद्यालय में इस प्रकोष्ठ के अन्तर्गत विश्ववि़द्यालय के शोधार्थी तथा शिक्षकों को भारत सरकार की विभिन्न प्रोजेक्ट प्रदत्त संस्थाओं के द्वारा जारी किए गए नए दिशा निर्देशों से अवगत कराने तथा प्रोजेक्ट स्वीकृत होने वाली मूलभूत एवं उपयोगी जानकारियां से अवगत कराना था। इस अवसर पर प्रो.राकेश कुमार जैन, प्रो.अरूण कुमार,प्रो.सत्येन्द्र राजपूत, डा.दीनदयाल,डा.उधम सिंह,डा.संदीप कुमार,डा.शिव कुमार चौहान,डा.प्रणवीर सिंह,डा.अनुज कुमार,डा.वेदव्रत,कुलभूषण शर्मा,हेमंत सिंह नेगी तथा शोध छात्र/छात्राओं में सरला राजपुरोहित,भावना,रजनीश,निर्वेदानन्द सहित विभिन्न शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
