आज़िम अख्तर
दैनिक मानव जगत

सहारनपुर के थाना गागलहेड़ी इलाके से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ है। क्षेत्र में सक्रिय हाईटेक खनन माफियाओं के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है जो पुलिस को चकमा देने के लिए बाकायदा ‘रेकी’ (लोकेशन ट्रैकिंग) का सहारा ले रहा था। एसएसपी अभिनंदन सिंह के कड़े रुख और कुशल निर्देशन में गागलहेड़ी पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने इस सिंडिकेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। पुलिस ने जाल बिछाकर गिरोह के मास्टरमाइंड समेत कुल 8 शातिर अभियुक्तों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। इस पूरे बड़े ऑपरेशन की सफलता का ब्योरा खुद कप्तान अभिनंदन सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया के सामने रखा।

पूरा मामला रात के अंधेरे में खेले जा रहे अवैध खेल से जुड़ा है। दरअसल, 23 मई की रात को वरिष्ठ उपनिरीक्षक अतुल कुमार और खनन निरीक्षक अभिलाष चौबे की टीम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी जब उन्होंने चेकिंग के दौरान अवैध रूप से चोरी का खनन ले जा रहे दो भारी-भरकम डंपरों को रुकवाया। हैरानी की बात यह थी कि इन डंपरों की पीछे की नंबर प्लेट गायब थी और आगे की प्लेट को अंदर की तरफ मोडकर छिपाया गया था ताकि कोई नंबर न पढ़ सके। इन गाड़ियों के पास माइनिंग या रॉयल्टी से जुड़ा एक भी वैध कागज नहीं मिला।

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि इन डंपरों के आगे-आगे एक हुंडई वेन्यू कार चल रही थी, जो पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के मूवमेंट की पल-पल की लोकेशन माफ़ियाओं को दे रही थी। पुलिस ने मौके से ही गाड़ियों को सीज कर दो मुख्य आरोपियों सुहैल और नदीम को गिरफ्तार किया। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए मुस्तैद पुलिस टीम ने आज गिरोह के छह अन्य मददगारों—रजत, शहजान, अंशुल, रजनीश, अहकाम और नौशाद को भी चारों तरफ से घेराबंदी करके दबोच लिया। पूरी कार्रवाई में पुलिस ने 5 मोबाइल फोन, 2 डंपर और वारदात में इस्तेमाल की जा रही हुंडई वेन्यू कार बरामद की है।

मुख्य आरोपी सुहैल ने पूछताछ में पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल करते हुए बताया कि वे लोग बिना कागजात के अवैध माइनिंग करते थे और कुछ क्रेशरों से चोरी-छिपे सस्ता माल खरीदकर उसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचते थे। अधिकारियों से बचने के लिए वे बाकायदा लग्जरी कारों से रेकी करते थे और लोकेशन के आधार पर डंपरों के रास्ते बदलवाते थे। इस शातिर नेटवर्क को ध्वस्त करने वाली जांबाज टीम में थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक राकेश कुमार सिंह, शिव कुमार, सुभाषचन्द्र, हेड कांस्टेबल निशांत चौधरी और कांस्टेबल अनुज, नरदेव व सुशांत कपिल मुख्य रूप से शामिल रहे। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और खनन अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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