मेयर ने राहगीरों को पिलाया शीतल जल और दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अजीम अख्तर
दैनिक मानव जगत

सहारनपुर में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच जनता को राहत पहुंचाने के लिए खुद शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह जमीन पर उतर आए हैं। आज दोपहर करीब एक बजे जब आसमान से आग बरस रही थी, तब मेयर डॉ. अजय कुमार सिंह वीआईपी गाड़ियों का तामझाम छोड़कर खुद अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार होकर दिल्ली रोड स्थित अपने आवास से बाहर निकले। उन्होंने शहर के विभिन्न चौराहों, कलेक्ट्रेट और दीवानी तिराहे से होते हुए करीब डेढ़ बजे घंटाघर पहुंचकर नगर निगम द्वारा सूरज की तपिश से लोगों के बचाव के लिए लगाई जा रही ‘ग्रीन नेट’ और ‘मिस्ट स्प्रे’ सिस्टम का गहनता से स्थलीय निरीक्षण किया।
घंटाघर चौराहे पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए महापौर ने कहा कि इस समय तापमान लगातार बढ़ रहा है और 44 से 45 डिग्री की इस झुलसा देने वाली गर्मी में ट्रैफिक सिग्नल पर एक से डेढ़ मिनट रुकना आम जनता और राहगीरों के लिए बेहद पीड़ादायक होता है। लोगों की इसी तकलीफ को समझते हुए नगर निगम सहारनपुर ने एक छोटा सा संवेदनशील प्रयास किया है, जिसके तहत चौराहों के बाईं ओर ग्रीन नेट और मिस्ट स्प्रे लगवाए गए हैं ताकि वाहन चालकों को कुछ पल के लिए ठंडी छांव और राहत मिल सके। मेयर ने मौके पर मौजूद महाप्रबंधक जल पुरुषोत्तम कुमार को सख्त निर्देश दिए कि महानगर के सभी प्रमुख चौराहों पर ग्रीन नेट लगाने के इस कार्य में और तेजी लाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जनता को शीतल जल उपलब्ध कराने के लिए शहर के 50 से अधिक सार्वजनिक स्थानों पर कूलर लगवा दिए गए हैं और जरूरत के अनुसार अभी और कूलर लगवाए जाएंगे।
निरीक्षण के दौरान मेयर डॉ. अजय कुमार सिंह ने घंटाघर पर लगी एक छबील पर खुद खड़े होकर राहगीरों और मुसाफिरों को अपने हाथों से मीठा और शीतल जल पिलाकर उनकी सेवा की। इस दौरान उनके साथ नगर निगम के उपसभापति मयंक गर्ग, वरिष्ठ पार्षद मुकेश गक्खड़, दिग्विजय चौहान और चौधरी वीरसेन सिद्धू आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। मेयर ने देश और दुनिया में गहराते ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को दोहराया। उन्होंने सहारनपुर की जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि जब बहुत जरूरी काम हो तभी इस चिलचिलाती धूप में घरों से बाहर निकलें, ऊर्जा की खपत को कम कर बिजली बचाएं, पानी की एक-एक बूंद का संचय करें और इस तपती धरती को बचाने के लिए अधिक से अधिक पौधों का रोपण करें ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।

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