पटना। नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री के पद से अपना इस्तीफा दे दिया है, जिससे बिहार की राजनीति में लगभग दो दशक से चले आ रहे एक युग का अंत हो गया है. राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद, वे अब केंद्रीय राजनीति की ओर रुख कर चुके हैं.
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने लोकभवन (राजभवन) जाकर राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. राज्यपाल ने नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही बिहार में नीतीश युग का समापन हो गया है.
इस्तीफा देने से पहले पटना में नीतीश कुमार ने कैबिनेट की आखिरी बैठक की. इसके बाद उन्होंने कहा, मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं. ये सुनते ही बैठक में मौजूद नीतीश के तमाम नेता इमोशनल हो गए. मंत्री लेसी सिंह तो मीडिया से बात करते हुए फफर पड़ीं. वहीं मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, आज सब भावुक थे, सभी की आंखें नम रहीं.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अंतिम कैबिनेट मीटिंग पर बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा, जिस प्रकार से उन्होंने बिहार में आर्थिक और सामाजिक बदलाव को लीड किया है. बिहार में व्यापक स्तर पर बदलाव आया है. आगे भी मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में बिहार में सरकार चलती रहेगी और राज्यसभा से भी मुख्यमंत्री बिहार के विकास में अपना योगदान देते रहेंगे. बिहार से जुड़े जो भी मुद्दे हैं वो उठाते रहेंगे.
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने नीतीश कुमार के इस्तीफे से पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट करते हुए लिखा कि 20 साल का साथ.. बिहार की बदलती कहानी के नाम. नीतीश कुमार ने अपनी लीडरशिप से बिहार को निराशा और अंधेरे के दौर से निकालकर विकास, सुशासन और भरोसे के रास्ते पर आगे बढ़ाया है. कानून-व्यवस्था ठीक करने से लेकर सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने तक, उन्होंने हर सेक्टर में एक मजबूत नींव रखी है.
इस्तीफा देने से पहले 14 अप्रैल को नीतीश कुमार ने आखिरी दिन भी मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी सारी जिम्मेदारियों को निभाया. उन्होंने भारत रत्न बीआर अंबेडकर की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.
नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है. संवैधानिक नियमों के अनुसार, संसद सदस्य बनने के बाद उन्हें राज्य विधायिका का पद छोड़ना अनिवार्य था, जिसके बाद अब उन्होंने अब मुख्यमंत्री पद भी छोड़ दिया है. अब नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति करने जा रहे हैं.
