अजीम अख्तर
दैनिक मानव जगत
सहारनपुर : बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर सरदार सिंह आईटीआई मैनेजमेंट कॉलेज सोराना (सरसावा) में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में अशोक चौधरी, मैडम सुनीता और अनु कुमार ने बाबासाहेब के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए और उपस्थित बच्चों को उनके बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा दी।बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के मऊ छावनी में हुआ था। उनकी माता का नाम भीमाबाई और पिता रामजी राव था, जो अंग्रेजी सरकार में सूबेदार के पद पर थे। उन्होंने 1907 में मैट्रिक पास करने के बाद एल. फिस्टन कॉलेज से इंटर की पढ़ाई की और 1912 में बीए पास किया। उच्च शिक्षा के लिए बड़ौदा नरेश सयाजीराव महाराज ने उन्हें अमेरिका भेजा, जहां 1915 में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की। 1920 में लंदन जाकर उन्होंने वकालत की पढ़ाई पूरी की और बैरिस्टर बन गए।1936 में उन्होंने इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी का गठन किया। 1937 के प्रांतीय चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल की। जुलाई 1941 में उन्हें गणित सुरक्षा सलाहकार समिति का सदस्य बनाया गया। 1952 में वे राज्यसभा सदस्य चुने गए और भारत के कानून मंत्री बने। बाबासाहेब को संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्होंने दिन-रात एक करके अथक मेहनत से भारत का संविधान तैयार किया, जो 2 वर्ष 11 माह 18 दिनों में पूरा हुआ और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।बाबासाहेब केवल दलितों के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के उत्थान के लिए समर्पित थे। उन्होंने महिलाओं और समाज के दबे-कुचले वर्गों के लिए निरंतर प्रयास किए तथा सभी के लिए शिक्षा के द्वार खोलने पर जोर दिया। उन्होंने देशवासियों को तीन महत्वपूर्ण मंत्र दिए — शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।6 दिसंबर 1956 को यह महान व्यक्तित्व हम सबको छोड़कर चला गया। उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया।कार्यक्रम में सभी ने भावुक होकर कहा — “जो भरा नहीं भाव से, बहती जिसमें रसधार नहीं, वह हृदय नहीं पत्थर है, जिसमें बाबा साहेब का प्यार नहीं।”बाबासाहेब अमर रहें। जय भीम! जय भारत!
