रक्तदान से कई बीमारियों का खतरा कम होता है- डॉ.शाह
हरिद्वार। एक व्यस्क व्यक्ति के शरीर में औसतन 10यूनिट रक्त होता है,जिसमें से व्यक्ति एक यूनिट (350मिली) रक्तदान कर सकता है लेकिन जागरूकता की कमी की वजह से व्यक्ति रक्तदान करने से डरता है या हिचकिचाता है।रक्तदान एक आलौकिक अनुभव है एवं जीवन बचाने के लिए हर पल रक्त की आवश्यकता होती रहती है।किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने से बड़ा कोई और पुण्य का कार्य नहीं हो सकता है,इसलिये रक्तदान महादान है। रविवार को स्वामी विवेकानंद हैल्थ मिशन सोसायटी द्वारा संचालित स्वामी रामप्रकाश चौरिटेबल चिकित्सालय में गोर्खाली सुधार सभा,शाखा हरिद्वार द्वारा जिला ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का उद्घाटन करते हुये इंडियन रेडक्रास उत्तराखंड के चेयरमैन व ऋषिकुल आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्रोफेसर (डा.)नरेश चौधरी ने कहा कि रक्तदान करने के बाद स्वंय को गर्व महसूस होता है,जनहित में रक्तदान एक सराहनीय प्रयास है।डा.चौधरी ने कहा कि रक्तदान एक महान कार्य है जो दूसरों की जान बचाने के साथ-साथ दाता के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत फायदेमंद है।यह हृदय रोग के खतरे को कम करता है,आयरन के स्तर को संतुलित रखता है,और नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को बढ़ावा देता है।इसके अतिरिक्त,यह वजन को नियंत्रित करने (कैलोरी बर्न) और मानसिक संतुष्टि में सहायक है।आज के आधुनिक दौर में टेक्नोलॉजी और मेडिकल साइंस ने चाहे कितनी भी तरक्की कर ली हो,लेकिन आज भी ब्लड यानी खून किसी फैक्ट्री में नहीं बनता।इसे बनाने वाली सुपर टेक्नोलॉजी आज भी हमारे शरीर में ही मौजूद है। चिकित्सालय के मेडिकल डायरेक्टर डा.संजय शाह ने कहा कि आमतौर जब व्यक्ति के लीवर या किडनी में आयरन संचित होने लगता है,तो उससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।दरअसल आयरन खून को गाढ़ा बना देता है,जिससे ह्दय रोग होने का जोखिम बढ़ता है।रक्त-दान करने से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है और ह्दय रोग का खतरा कम होता है।इसके अलावा डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी बिमारियों के होने की आशंका को कम करता है।रक्त-दान से स्ट्रोक का खतरा भी 33प्रतिशत तक कम हो जाता है।कैंसर का जोखिम कम करता है। 50किलो से अधिक वजन के लोग रक्तदान कर सकते हैं।रक्त में 12-5 ग्राम या इससे अधिक हीमोग्लोबिन का स्तर हो।18 से 65साल का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की अति आवश्यकता है।चिकित्सालय महाप्रबंधक निधि धीमान ने शिविर में पहुंचे लोगों की सराहना करते हुये कहा कि आज भी देश में बड़ी संख्या में लोग रक्त की कमी के बाद अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ो के अनुसार केवल दो प्रतिशत और अधिक रक्तदाताओं का रक्तदान के लिए आगे आना कई लोगों की जान बचा सकता है। गोर्खाली सुधार सभा शाखा अध्यक्ष शमशेर बहादुर बम ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में पहुंचे युवाओं का हौसला आफजाई करते हुये कहा कि युवाओं का यह प्रयास सराहनीय व प्रेरणादायक है।नियमित रक्तदान से रक्त में आयरन की मात्र संतुलित रहती है,जिससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा कम होता है।रक्तदान के बाद शरीर तेजी से नए ब्लड सेल्स बनाता है,जिससे मेटाबालिज्म सुधरता है।रक्तदान से पहले डोनर का हीमोग्लोबिन,ब्लड प्रेशर और अन्य ज़रूरी जांच की जाती है,जिससे स्वास्थ्य का पता चलता है।ब्लड बैंको में सीमित मात्र में ही रक्त होता है।इसलिए हमें रक्तदान शिविर आयोजित कर सामूहिक रूप से रक्तदान करना चाहिये।रक्तदान को सबसे बड़ा दान बताते हुये उन्होंने कहा कि पीड़ित को समय पर रक्त मिलने से उसे एक नया जीवन मिलता है।रक्तदान शिविर में सहयोग करने वालो में पदम सिंह गुरूंग,प्रमोद पुरी,सौरभ सिंह,हीरालाल शर्मा, हरीश कुमार,राहुल कुमार,खेम बहादुर,अजय सिंह,ओमप्रकाश,अभिषेक पौडेल,डा-संजय शाह, विपिन कुमार गौतम,भरत,यश कुमार,चिरंजीव ज्ञवाली,डा-डम्बर प्रसाद पौडेल,किशन थापा ,प्रेम सागर,दिलीप राज जोशी,गौरभ अरोड़ा,पुष्पराज पांडे,नारायण शर्मा,शंकर पांडे के अतिरिक्त शिविर को सफल बनाने में जिला ब्लड बैंक के डॉ.रविन्द्र चौहान,सुश्री विजयश्री, श्रीमति बेबी सैनी,सुश्री रैना नैयर,उमेश सैनी,वर्णिक चौधरी,दीपक शर्मा,अदीति और नामंदिनी का सहयोग रहा।

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