पटना ,06 फरवरी। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों और प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज को भारी पड़ गया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान जन सुराज पार्टी को शीर्ष अदालत से कड़ी फटकार सुननी पड़ी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल पूछे और तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक फायदे और लोकप्रियता हासिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को मंच नहीं बनाया जाना चाहिए।
हार के बाद कोर्ट आने पर जजों ने लगाई क्लास
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत ने जन सुराज पार्टी के वकीलों को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जब जनता ने आपको चुनाव में पूरी तरह खारिज कर दिया है, तो अब आप चर्चा में रहने के लिए न्यायिक मंचों का सहारा ले रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि जब पार्टी चुनाव में अपना सब कुछ हार गई, तब वह यहां याचिका लेकर आ गई। जजों ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपको कोर्ट के सामने अपनी ‘सद्भावना भी साबित करनी होगी।
राजनीतिक दलों के कहने पर नहीं होगी जांच
कोर्ट ने मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। पीठ ने कहा कि हम फ्रीबीज के मुद्दे की जांच कर रहे हैं, लेकिन यह मामला उससे अलग है। यहां एक ऐसी राजनीतिक पार्टी हमारे सामने खड़ी है जो चुनाव में बुरी तरह हार चुकी है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि हम किसी राजनीतिक दल के कहने पर या उनकी हताशा के चलते फ्रीबीज के मुद्दे की जांच नहीं करना चाहते।
किस कानून के तहत चुनाव रद्द करने की मांग?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर इलेक्शन पीटिशन के नियमों की किस धारा के तहत पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग की जा सकती है? इस पर जन सुराज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने कहा कि वह चुनाव रद्द करने की विशेष मांग पर अब जोर नहीं देंगे, लेकिन याचिका में अन्य राहतें भी मांगी गई हैं। उन्होंने दलील दी कि यह मामला भ्रष्ट आचरण से जुड़ा है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के साथ-साथ ‘लेवल प्लेइंग फील्ड प्रभावित हुआ है।
महिलाओं को पैसे देने को बताया था भ्रष्ट आचरण
गौरतलब है कि प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। पार्टी ने कथित अवैध प्रथाओं के आधार पर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी। जन सुराज का मुख्य आरोप था कि चुनाव आचार संहिता लागू रहने के दौरान राज्य में महिलाओं को सीधे 10,000 रुपये दिए गए, जिसे उन्होंने भ्रष्ट आचरण बताया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पार्टी की दलीलों को दरकिनार करते हुए सख्त रवैया अपनाया है।
