सहारनपुर। थाना सदर बाजार पुलिस व यूपी एसटीएफ की संयुक्त टीम ने दो शातिर आरोपियों को दबोचकर जीएसटी चोरी के मुकदमें का खुलासा करने में सफलता हासिल कर ली। पुलिस ने दबोचे गये आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल,चैक बुक व एक लैपटॉप बरामद कर उनका चालान काटकर जेल भेज दिया।
अपर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि विगत् 27 अगस्त को वादी परितोष कुमार मिश्रा आयुक्त राज्य कर अधिकारी खण्ड 08 की तहरीर पर शौर्या फर्म आदि के खिलाफ थाना सदर बाजार पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया था।
उन्होंने बताया कि आज कोतवाली सदर बाजार पुलिस व यूपी एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कोतवाली प्रभारी कपिल देव, उपनिरीक्षक विपिन कुमार, जयवीर सिंह, अमरीश कुमार व यूपी एसटीएफ के उपनिरीक्षक जावेद आलम सिद्दकी, चन्द्र प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में शालीमार गार्डन से दो शातिर आरोपियों मौहम्मद शादाब पुत्र स्व. भूरे खान निवासी प्लाट नं.-149 टाप फ्लोर फ्लैट न.-2 शालीमार गार्डन साहिबाबाद थाना शालीमार गार्डन जनपद गाजियाबाद व मौहम्मद आलम पुत्र मोहम्मद रफीक, निवासी ई/56, आर 31, विलेज खेड़ा, शाहदरा, दिल्ली हाल निवासी फारूख नगर, असालतपुर, लोनी गाजियाबाद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दबोचे गये आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक लैपटाॅप, एक चैक बुक, एक पैनकार्ड बरामद कर लिया।
अपर पुलिस अधीक्षक श्री यादव ने बताया कि पूछताछ में दबोचे गये आरोपी मौहम्मद आलम ने खुलासा किया कि उसने वर्ष 2018 मे टैली की ट्रेनिंग की थी। वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात मुस्तफाबाद जमुना विहार में मेरठ निवासी मोहसिन सैफी से हुई थी। मैंने और मेरे साथी शादाब ने मोहसिन की फर्माे का बिलिंग का कार्य करने शुरु कर दिया था। मोहसीन की बोगस फर्में ज्यादा होने के कारण हमने बिलिंग का कार्य छोड़कर मोहसीन की सभी बोगस फर्माे की जीएसटी आर-1, 3बी रिटर्न का कार्य करने लगे थे। आरोपियों ने बताया कि जाली दस्तावेजो का प्रयोग कर बोगस फर्मे रजिस्टर्ड की गई थी। जिनके दस्तावेज आलम निवासी फरूखनगर टीला मोड़ गाजियाबाद रखा गया था। शादाब एक बोगस फर्म के दस्तावेज बनाने के 10,000 रूपये लेता था। जाली दस्तावेजो में जो पैनकार्ड व आधार कार्ड इस्तेमाल होता था। वह वास्तविक धारक का होता था। क्योकि फर्म का जीएसटी रजिस्टर करते समय उसका ओटीपी आधार से लिक मोबाइल पर ही जाता था। उन्होंने बताया कि कई बोगस फर्मे बनायी गयी थी। मेरे तथा शादाब के द्वारा उन फर्माे से प्रति एक करोड़ के बिल पर एक लाख रूपये कमिशन लिया जाता था। सैल पर्चेज को वास्तविक रूप देने के लिए बोगस व वास्तविक फर्माे से कैश व एकाउण्ट में जमा करा दिया जाता था।

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