दिल्ली धमाके के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने और संसद के शीतकालीन सत्र को आगे बढ़ाने की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सुरक्षा चूक पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2,900 किलो विस्फोटक लाल किले तक कैसे पहुंचा। दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है और कहा है एक दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र को समय से पहले इस बैठक को बुलाया जाए ताकि इस घटना पर बहस हो सके। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होना है, लेकिन इस धमाके को देखते हुए सत्र को पहले बुलाया जाना चाहिए ताकि इस पर व्यापक चर्चा हो सके। खेड़ा ने सवाल किया कि 2,900 किलो विस्फोटक फरीदाबाद से लाल किले तक कैसे पहुंचा, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। खेड़ा ने कहा कि जब यूपीए सरकार के समय मुंबई हमला हुआ था, तब तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने इस्तीफा दिया था। आज भी किसी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धमाके के 48 घंटे बाद सरकार ने इसे आतंकी हमला बताया, जो चौंकाने वाला है।

कांग्रेस ने कहा कि पार्टी हमेशा आतंकवादी हमलों पर सरकार के साथ खड़ी रही है, लेकिन जवाबदेही तय करना जरूरी है। खेड़ा ने पूछा कि क्या अब भी सरकार की ‘न्यू नॉर्मल डॉक्ट्रिन’ लागू है, जिसके तहत पहलगाम हमले के बाद हर आतंकी घटना को ‘युद्ध जैसा कृत्य’ माना गया था। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को शीतकालीन सत्र की तैयारियों को लेकर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और सचिव जनरल पी. के. मोदी के साथ अहम बैठक की। संसद भवन में हुई इस बैठक में आगामी सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने से संबंधित व्यवस्थाओं और संभावित एजेंडे पर चर्चा हुई। राज्यसभा सचिवालय ने ‘एक्स’ पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि सत्र की तैयारी को लेकर सभी विभागों के बीच समन्वय पर भी विचार किया गया।

शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कुल 15 कार्य दिवस होंगे। इस दौरान कई विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और हालिया दिल्ली धमाके जैसी घटनाओं से जुड़ी रिपोर्टों पर भी बहस हो सकती है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सत्र के दौरान संसदीय कार्यवाही में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित किया जाए ताकि सभी मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके। 

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