हरिद्वार। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज के प्रो.डा.नरेश चौधरी ने उत्तराखंड प्रशासन अकादमी नैनीताल द्वारा आपातकालीन स्थिति में मनोसामाजिक सहायता विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं इण्डियन रेडक्रास का प्रतिनिधित्व करते हुए दैवीय,प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों से अनुभवों को कार्यशाला मे उपस्थित प्रतिभागियों से साझा करते हुए कहा कि आपदाओं के बाद प्रभावित परिवारों एवं व्यक्तियों पर जो प्रभाव पड़ता है।उसका असर जीवन भर रहता है।जिससे उबरने एवं फिर से पुर्नस्थापित करने में आकस्मिक रूप से दी गयी मनोसामाजिक सहायता अहम है।जो समाज के समर्पित स्वंयसेवक ही सबसे पहले मौके पर पहुंचकर देते हैं।जो प्रभावित व्यक्तियों के कभी नहीं भूलने वाले दुखों को निश्चित रूप से कम करती है।डा.नरेश चौधरी ने कहा कि सभी प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को समाज को विशेष रूप से जागरूक करने के लिए वृहद स्तर पर मनोसामाजिक सहायता के प्रति अभियान चलाना चाहिये।उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.डा.अरूण त्रिपाठी एवं कुलसचिव नरेन्द्र सिंह ने कहा कि डा.नरेश चौधरी अपने मूल दायित्वों के निर्वहन के साथ आपदाओं के दौरान सहायता के लिए समर्पित रहते हैं।कार्यशाला में एसडीआरएफ,शिक्षा,चिकित्सा,सामाजिक,स्वंयसेवी संस्थाओं के विभिन्न जनपदों के स्वंय सेवकों एवं प्रतिनिधियों द्वारा विशेष प्रतिभाग किया गया।उत्तराखण्ड प्रशासन अकादमी के आपदा प्रकोष्ठ प्रभारी डा.ओमप्रकाश,कोर्स निदेशक मंजू पाण्डे,रिकोर्स पर्सन कॉर्डियोलोजिस्ट डा.सुधाश सिंह,डा.मालिनी श्रीवास्तव,डा.मधुलता नयाल,अजहर राशिदी ने डा.नरेश चौधरी को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनके द्वारा आपदाओं में किये गये कार्यों की सराहना की।
