प्रयागराज ,23 जनवरी । माघ मेले में प्रशासन और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मेला प्रशासन द्वारा स्वामी जी को एक और नोटिस जारी किया है। जिसमें प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब मांगते हुए मेला से प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है। वहीं, इस नोटिस के बाद बाद उनके समर्थकों और भक्तों में भारी आक्रोश है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब सरकार पूरी तरह से बदले की भावना के साथ कार्रवाई कर रही है। प्रशासन ने पारदर्शिता का उल्लंघन करते हुए शंकराचार्य शिविर पांडाल के पीछे बैक डेट में नोटिस चस्पा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस लगाने के बाद अधिकारी खुद आकर कहने लगे कि आपने इसका जवाब क्यों नहीं दिया।
प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस में 24 घंटे के भीतर जवाब न देने पर मेले से प्रतिबंधित करने और सुविधाएं निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इस पर शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने स्पष्ट किया कि नोटिस का जवाब तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे प्रशासन को सौंप दिया जाएगा।
प्राप्त नोटिस में लिखा है कि मौनी अमावस्या पर आपात परिस्थितियों के उपयोगार्थ आरक्षित त्रिवेणी पन्टून पुल नंबर 2 पर लगे बैरियर को तोड़ते हुये संगम अपर मार्ग से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बग्घी पर सवार होकर भीड़ के साथ जाया जा रहा था। जबकि मेला पुलिस एवं प्रशासन द्वारा संगम क्षेत्र में किसी प्रकार के वाहन न ले जाने की उद्घोषणा बार-बार की जा रही थी। स्नानार्थियों की अत्यधिक भीड़ थी और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। वह क्षेत्र स्नानार्थियों के आवागमन एवं सुरक्षा के दृष्टिगत अत्यन्त संवेदनशील था। लेकिन आपके उक्त कृत्य के कारण मेला पुलिस एवं मेला प्रशासन को भीड़ प्रबन्धन में अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। आप द्वारा वाहन निषिद्ध क्षेत्र संगम नोज तक अपनी बग्घी लेकर, जहां लाखों की संख्या में स्नानार्थी स्नान कर रहे थे, जाने का प्रयास किया था।
नोटिस में आगे लिखा है कि आपके कृत्य से मौनी अमावस्या पर माघ मेला की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई और स्नान हेतु आ रहे लाखों स्नानार्थियों को सुरक्षित स्नान कराकर उन्हें वापस भेजने में मेला में आये जन मानस की सुरक्षा व्यवस्था को गम्भीर खतरा उत्पन्न हुआ। उक्त के अतिरिक्त आप द्वारा अपने को शंकराचार्य बताते हुये मेले में बोर्ड आदि लगाये गये हैं, जबकि आधिकारिक रूप से आपके शंकराचार्य होने पर सर्वोच्च न्यायालय से रोक है, जो सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में है। आपको सूचित किया जाता है कि कृपया 24 घंटे के अन्दर यह स्पष्ट करें कि आपके उक्त कृत्य के कारण आपकी संस्था उपरोक्त को दी जा रही भूमि एवं सुविधाओं को निरस्त कर आपको सदैव के लिये मेले में प्रवेश से प्रतिबन्धित क्यों न कर दिया जाय। यदि उक्त निर्धारित अवधि में आपका उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो यह मानते हुए कि इस सम्बन्ध में आपको कुछ नहीं कहना है, तदनुसार निर्णय पारित कर दिया जायेगा।

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