आलमगीर के आवास और आफिस पर टीम घंटो करती रही जांच-पड़ताल।
पांच लाख रुपये मे पांच वर्ष पूर्व शुरू किया कारोबार, खड़ा कर लिया अरबो का एम्पायर।
कुशीनगर, 17 दिसम्बर। कभी नकली नोट तो कभी धर्मांतरण व दुष्कर्म के आरोप को लेकर चर्चा मे रहने वाले रेडहिल रियल स्टेट कम्पनी के मालिक आलमगीर एक बार फिर सुर्खियों मे आ गये है। चर्चा है कि आय कर विभाग की टीम ने आलमगीर के घर और रेडहिल आफिस पर छापेमारी कर घंटो जांच-पड़ताल किया। सूत्रो का कहना है कि इस छापेमारी में ट्रैक्स चोरी के बडे मामले का खुलासा हो सकता है। बताना जरूरी है आलमगीर वर्ष 2020 में पांच लाख रुपये से जमीन की खरीद- परोख्त का कार्य शुरू किया था और आज अरबो की संपत्ति के साथ एक बडा एम्पायर खडा कर लिया है। जिसको बीते माह मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद आयकर विभाग ने छापेमारी की यह कार्रवाई की है।
बताते चलें कि पूर्वांचल के बडे रियल स्टेट कम्पनी में शुमार जिले के कसया स्थित रेडहिल रियल स्टेट कम्पनी के मालिक आलमगीर के घर और आफिस पर आयकर विभाग की टीम मंगलवार को सुबह तकरीबन आठ बजे एक साथ छापा मारा। इस दौरान आलमगीर सहित उनके पारिवारिक सदस्य व सहयोगियों के मोबाइल को टीम ने जब्त कर लिया और घंटो जांच-पड़ताल के साथ कागजातो को खंगालती रही। ऐसी चर्चा है कि वर्ष 2020 मे पांच लाख रुपये से जमीन की खरीद-फरोस का कारोबार शुरू करने वाले आलम गीर महज पांच वर्षो में अरबो रुपये का साम्राज्य खडा कर लिया है। हालांकि आयकर विभाग की टीम सब कुछ गोपनीय रखते हुए मीडिया से दूरी बनाये रखी।
इनसेट– आलमगीर के फर्श से अर्श तक के सफर पर एक नजर– बताया जाता है कि पडोसी राज्य बिहार के गोपालगंज जिले के निवासी आलमगीर पहले कमीशन पर जमीन की दलाली करते थे । वर्ष 2019 मे उसने अपने गांव की एक जमीन पांच लाख रुपये में बेचकर रेडहिल रियल स्टेट कम्पनी की स्थापना किया। बताया जाता है कि कम्पनी के स्थापना के दो वर्ष बाद आलमगीर के पास पैसो की बारिस होने लगी। नतीजतन जमीन की दलाली कर कमीशन के दम पर अपना जीविकोपार्जन करने वाले आलमगीर महज पांच वर्षो मे ही एक बडा एम्पायर खडा करके अरबपति बन गया। यही वजह है कि आलमगीर के कारोबार की चर्चा चौक-चौराहों पर होने लगी। हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक हो गया कि इतने कम समय में फर्श से अर्श तक की लंबी यात्रा को आलमगीर ने सिर्फ पांच वर्षो मे कैसे पुरा कर लिया? आम लोगो का कहना है कि ईमानदारी से किये गये किसी भी कारोबार में इस तरह की तरक्की नामुमकिन है। कहना न होगा कि लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्रों ने अगस्त माह मे ‘Ó जमीन की दलाली से लेकर कम्पनी के मालिक बनने तक आलमगीर का सफर ‘Ó नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। उस दरम्यान जानकारों ने बताया था कि प्लाटिंग करने से पहले खेती वाले जमीन को तहसील से आवासीय जमीन के रुप मे परिवर्तित कराने के बाद ही उस जमीन का प्लाटिंग करके बेचने का प्राविधान है। अब सवाल यह उठता है कि क्या रेडहिल रियल स्टेट कम्पनी इस गाइडलाइन का पालन करती है? उस समय मीडिया ने आलमगीर से उनके इनकम आफ सोर्स के बारे मे पूछा तो आलमगीर ने बताया था कि उनकी कंपनी मे कार्यरत चार सौ से अधिक कर्मचारियों के सापेक्ष दो सौ कर्मचारी प्रति दिन बीस हजार रुपये की धनराशि एडवांस के तौर पर जमा करते है ( मतलब चालीस लाख रुपये कंपनी मे जमा करते है।) आलमगीर के बातो पर यकीन करे तो इस हिसाब से 12 करोड रुपये मासिक और सलाना 144 करोड रुपये कम्पनी मे सिर्फ एडवांस धनराशि जमा होती है, तो क्या रेडहिल कम्पनी इस धनराशि का टैक्स जमा करती है? जबकि जमीन की पुरी धनराशि अभी बाकी है जो उपभोक्ताओं द्वारा रजिस्ट्री के दौरान जमा किया जाता है। इसका टेक्स अलग है जो मीडिया ने अगस्त माह मे प्रकाशित खबर में यक्ष प्रश्न खडा किया था। आयकर विभाग के टीम की छापेमारी को स्थानीय लोग मीडिया द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किये गये खबर व उस खबर मे उठाये गये सवाल को जोडकर देख रहे।
