बल्दीराय/सुल्तानपुर 17 दिसंबर क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और छाए घने कोहरे ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। सुबह और देर रात सड़कों पर कोहरे की मोटी चादर छाई रहने से विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों को कुछ ही मीटर आगे तक देख पाना मुश्किल हो रहा है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बन रही है।
स्थिति यह है कि कोहरे में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में कोहरे में सावधानी हटी कि दुर्घटना घटी की कहावत चरितार्थ होने की आशंका बढ़ गई गई है।
कोहरे से यातायात, दिनचर्या और फसल होंगी प्रभावित
ठंड और कोहरे का असर सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ रहा है। सुबह काम पर निकलने वाले मजदूर, किसान, विद्यार्थी और ड्यूटी जाने वाले लोग ठिठुरन के साथ कोहरे की मार झेलने को मजबूर हैं। वहीं बुजुर्गों और बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ अरुणेश सिंह ने लोगों को ठंड से बचाव, गर्म कपड़े पहनने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। दूसरी ओर, खेतों में खड़ी फसलों पर कोहरे का मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। इस मौसम में गेहूं की फसल के लिए कोहरा वरदान साबित होता है। कोहरे से मिलने वाली नमी गेहूं की बढ़वार में सहायक होती है, जिससे पैदावार बेहतर होने की उम्मीद रहती है।
हालांकि, दलहन और तिलहन फसलों के लिए यही कोहरा नुकसानदेह बन सकता है। चना, मसूर, मटर, सरसों आलू और अन्य तिलहनी फसलों में अधिक नमी के कारण फफूंद आदि रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें आलू की फसल को कोहरे और अधिक ठंड से पाला और फफूंद का अधिक ही जोखिम होता है। जिससे इन फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कृषि वैज्ञानिक विनोद सिंह ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें और आवश्यकतानुसार फफूंदी नाशक तथा उचित दवाओं का समय पर छिड़काव करवाएं।कुल मिलाकर, कड़ाके की ठंड और कोहरा जहां एक ओर जीवन को चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ फसलों के लिए लाभकारी भी सिद्ध हो रहा है।और कुछ फसलें प्रभावित भी हो सकती हैं , ऐसे में सतर्कता और समझदारी ही नुकसान को कम कर सकती है।
