अभिमन्यु वालिया
सहारनपुर। मां शाकंभरी देवी के दरबार में माथा टेककर, मन में श्रद्धा और घर लौटने की खुशी लिए निकले श्रद्धालुओं ने शायद सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी यह यात्रा जिंदगी का सबसे दर्दनाक सफर बन जाएगी। नवरात्रि में मां की ज्योत लेकर निकले इन श्रद्धालुओं की राह में मौत ऐसा झपट्टा मारेगी कि चार परिवारों के चिराग हमेशा के लिए बुझ जाएंगे। किसी घर का जवान बेटा वापस नहीं लौटेगा, किसी मां की आंखें अपने लाल को तलाशती रह जाएंगी और किसी परिवार की खुशियां हमेशा के लिए मातम में बदल जाएंगी।
सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र में शनिवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी के दर्शन कर मेरठ लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी ट्रॉली सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर रुकी थी। कुछ लोग चाय पीने के लिए उतरे थे, तो कुछ ट्रॉली के आसपास ही मौजूद थे। इसी बीच पीछे से आए बेकाबू कंटेनर ने ट्रॉली में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कई लोग उछलकर करीब दस फीट दूर सड़क पर जा गिरे। पल भर में सड़क पर चीख-पुकार मच गई। किसी को अपने साथी की चिंता थी, तो कोई अपनों को आवाज लगाकर तलाश रहा था, जिस रास्ते पर कुछ देर पहले तक भक्ति और उल्लास का माहौल था, वहां अचानक दर्द, अफरा-तफरी और बेबसी का मंजर छा गया। श्रद्धालुओं की टोली में शामिल लोग एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे। घायल दर्द से कराह रहे थे और मदद के लिए आवाजें लगा रहे थे। आसपास के लोग भी हादसे का मंजर देखकर सहम गए। सूचना मिलने पर पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार शुरू हुआ, लेकिन इस हादसे में चार परिवारों के हिस्से ऐसा दुख आया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। मेरठ के सरधना क्षेत्र के कुशावली गांव निवासी अमन राणा (25), रमेश उर्फ रिंकू (55), सागर (22) और पंकज (25) की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। किसी ने अपना जवान बेटा खोया, तो किसी ने अपने परिवार का सहारा। उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर खड़े इन चार लोगों की जिंदगी एक ही हादसे में थम गई।
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परिजन कर रहे थे इंतजार
सहारनपुर। नवरात्रि में मां के दर्शन और ज्योत लेकर लौट रहे श्रद्धालुओं की इस यात्रा का उद्देश्य आस्था और भक्ति से जुड़ा था। परिवारों को उम्मीद थी कि दर्शन के बाद अपने प्रियजन सुरक्षित घर लौटेंगे और यात्रा की बातें साझा करेंगे। मगर नियति ने ऐसा दर्दनाक मोड़ लिया कि घरों में इंतजार की जगह मातम ने ले ली। जिन रास्तों से अपनों के लौटने की राह देखी जा रही थी, उन्हीं रास्तों से हादसे की खबर पहुंची तो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा होगा।
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कांप गई हर किसी की रूह
सहारनपुर। प्रत्यक्षदर्शी सुनील के मुताबिक, श्रद्धालु ज्योत लेकर लौट रहे थे और कुछ लोग चाय पीने के लिए दुकान पर रुके थे। तभी कंटेनर ने ट्रॉली को टक्कर मार दी। यह बयान उस भयावह पल की तस्वीर सामने रखता है, जब कुछ ही सेकंड में सब कुछ बदल गया।
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जिलाधिकारी ने दिए बेहतर उपचार के निर्देश
सहारनपुर। हादसे में 20 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना ने दुर्घटना की भयावहता को और बढ़ा दिया। अस्पताल में घायल अपने दर्द से जूझ रहे थे, जबकि मृतकों के परिजनों के सामने अपनों को हमेशा के लिए खो देने का असहनीय सच था। जिला अस्पताल पहुंचे जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए।
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तेज रफ्तार लील रही जिंदगी
सहारनपुर। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क पर एक पल की लापरवाही कितनी जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। हाईवे पर भारी वाहनों की रफ्तार और सड़क किनारे खड़े वाहनों के आसपास सुरक्षा का सवाल एक बार फिर सामने है। चार लोगों की मौत और कई परिवारों का दर्द इस दुर्घटना को महज एक खबर नहीं, बल्कि ऐसी त्रासदी बनाता है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देती रहेगी।
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चार घरों में अब कभी नहीं लौटेगी वह खुशी
सहारनपुर। अमन राणा, सागर और पंकज जैसे युवा जीवन के कई सपनों के साथ आगे बढ़ रहे होंगे। वहीं 55 वर्षीय रमेश उर्फ रिंकू अपने परिवार के लिए अनुभव और सहारे का नाम रहे होंगे। हादसे ने चारों की जिंदगी छीन ली। अब उनके परिजनों के लिए हर त्योहार, हर पारिवारिक अवसर और अपनों की याद एक गहरे दर्द के साथ आएगी।
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चाय की दुकान पर रुका जिंदगी का सफर
सहारनपुर। श्रद्धालु कुछ देर आराम करने और चाय पीने के लिए सड़क किनारे रुके थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह छोटा-सा पड़ाव इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। पीछे से आए कंटेनर की टक्कर ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। कुछ ही पलों में सड़क पर चीख-पुकार मच गई और धार्मिक यात्रा मातम में बदल गई।
