–ढमोला नदी अपने अस्तित्व की लड़ रही आखिरी लड़ाई
— गिल कॉलोनी में सिंचाई विभाग की करीब 1 हजार गज जमीन पर डेयरी के कब्जे का आरोप
— संकुचित नदी और जहरीले पानी से बाढ़ व स्वास्थ्य संबंधी खतरे, उठ रहे सवाल
अभिमन्यु वालिया
सहारनपुर। शहर के बीचोंबीच बहने वाली ढमोला नदी अतिक्रमण, गंदगी और औद्योगिक प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है, और एक तरह से अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई भी लड़ रही है। नदी की जमीन पर कब्जे और उसमें गिरते गंदे पानी को लेकर सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि गिल कॉलोनी में विभाग की करीब 1 हजार गज जमीन पर वर्षों से डेयरी संचालित हो रही है, लेकिन अब तक कब्जा हटाने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। नदी का प्रवाह बाधित होने से आसपास की कॉलोनियों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
— 300 मीटर चौड़ाई का दावा, बची 30 मीटर
ढमोला नदी का उद्गम शिवालिक की शाकुंभरी रेंज से होता है। यह शाकुंभरी विहार और जनकपुरी से होते हुए शहर में प्रवेश करती है तथा गिल कॉलोनी, शारदा नगर, नुमाइश कैंप, हकीकत नगर और पिंजौरा से गुजरकर हिंडन नदी में मिलती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, राजस्व रिकॉर्ड में नदी की चौड़ाई करीब 300 मीटर बताई गई है, जबकि कई स्थानों पर इसका दायरा घटकर 20 से 40 मीटर रह गया है। हालांकि, वास्तविक सीमा और अतिक्रमण की स्थिति की आधिकारिक पैमाइश जरूरी है।
— डेयरी के कब्जे से जलप्रवाह बाधित होने का आरोप
गिल कॉलोनी में कथित अतिक्रमण को लेकर नगर निगम और सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि वर्ष 2024 में महापौर डॉ. अजय कुमार और नगरायुक्त ने मौके का निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। वर्ष 2013 और 2023 में गिल कॉलोनी, शारदा नगर और टैगोर गार्डन में जलभराव की घटनाओं को भी नदी के अवरुद्ध प्रवाह से जोड़कर देखा जा रहा है।
— सीवर और फैक्ट्रियों के पानी से प्रदूषण
ढमोला में शहर के सीवर और औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी पहुंचने का दावा किया गया है। पांवधोई नदी का पानी भी इसमें मिलता है। आरोपों के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट नदी को प्रदूषित कर रहा है। पानी की गुणवत्ता और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होना जरूरी है।
— 9.94 करोड़ की सफाई परियोजना पर निगाहें
शासन से शाकुंभरी विहार से पिंजौरा तक नदी की सफाई के लिए 9.94 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर होने की जानकारी दी गई है। इसके तहत सिल्ट और कचरा हटाया जाना प्रस्तावित है। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि पहले अतिक्रमण हटाया जाए, प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और परियोजना की पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
— जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय स्तर पर सिंचाई विभाग की जमीन की पैमाइश, कथित कब्जे की जांच, डेयरी के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई, औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी और सफाई परियोजना के टेंडर व कार्यों की जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह है कि नदी को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए संबंधित विभाग ठोस कदम कब उठाएंगे?
