हरिद्वार। मानवीय व्यवहार के प्रति संवेदनशील एवं आचार-आचरण की शिक्षा युवाओं के जीवन मे बदलाव की एक सकारात्मक पहल हो सकती है।इस उददेश्य को लेकर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वैदिक परिवेश मे भारतीय शिक्षा दर्शन और आधुनिक एवं अकादमिक दृष्टि के जुडे अनुभवों को नजदीक से जानने एवं संवाद की जिज्ञासा लेकर ऋषिहुड़ विश्वविद्यालय,सोनीपत के 310 छात्र-छात्राओं के दल ने रविवार को गुरुकुल कांगड़ी परिसर मे अपना शैक्षणिक भ्रमण पूरा किया।शैक्षिक भ्रमण के दल का स्वागत सम्मान विश्वविद्यालय सभागार मे प्रो.एल.पी.पुरोहित के संयोजन मे सम्पन्न हुआ।कुलसचिव प्रो.सत्यदेव निगमालंकार ने छात्र-छात्राओं के जीवन मे शैक्षिक भ्रमण एवं संवाद को प्रेरक कार्यक्रम बताया।कार्यक्रम के संयोजक एवं उपकुलसचिव डॉ.श्वेतांक आर्य ने कहा कि युवाओं की चारित्रिक उन्नति,स्वभाव मे सरलता एवं वैचारिक प्रखरता के लिए युवाओं के अधिक संवाद करने पर बल दिया।मुख्य वक्ता के रूप मे वैदिक एवं आर्य परम्पराओं के मूर्धन्य विद्वान,संस्कृत के आचार्य प्रो.ब्रह्मदेव विद्यालंकार ने छात्रों को गुरूकुलीय परपराओं की छात्र जीवन मे महनी आवश्यकताओं एवं समस्या समाधान मे उनकी उपादेयता पर मार्गदर्शन किया।अपने संबोधन मे प्रो.ब्रह्मदेव ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आचार-विचार,संस्कार,संस्कृति एवं आपसी समन्वय का जीवंत उदाहरण एवं रीढ़ की हड्डी का काम करता है।मुंशीराम से स्वामी श्रद्धानंद बनने तक की यात्रा गुरुकुलीय परम्पराओं की पोषक एवं संवाहक है।कहॉ कि कर्म मे वैचारिकता के आधार पर विभिन्नताएँ व्यक्ति के अस्तित्व की निर्माता है।भारतीय शिक्षा मातृवान ,पितृवान तथा आचार्यवान के स्वरूप का गठन करती है जो मानव बनाने के लिए मनुर्भव को समआदर प्रदान करती है।वर्तमान मे स्मित मच्छार की घटना मानवीय संवेदनाओं तथा वर्तमान शिक्षा-दीक्षा के लिए चिंता का विषय है।जिसके मूल मे आपसी भेदभाव मे बढती दूरी एक बडा कारण हो सकती है।उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था मे परिवर्तन करके विश्व के लिए चुनौती बन रहे वातावरणीय संकटों के समाधान प्राप्त किये जा सकते है, जिसके लिए युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के मूल्यों को समझना जरूरी होगा।उन्होने युवा छात्र-छात्राओं के लिए इस प्रकार के संवाद एवं शैक्षिक कार्यक्रमों को आवश्यक बताया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.हिमांशु पण्डित एवं डॉ.शिखा द्वारा किया गया।ऋषि हुड विश्वविद्यालय की ओर से डॉ.कनिष्का शर्मा, एकेडमिक डीन प्रो.मनोज कन्नन,सहायक निदेशक प्रो.माहित चौधरी,सस्टेक,वत्सला सिंह,न्यूटन ने गुरुकुल कांगड़ी के शिक्षकों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।कार्यक्रम मे डीन,एकेडमिक प्रो.सीमा शर्मा,प्रो.बिन्दु अरोडा,उपकुलसचिव डॉ.श्वेतांक आर्य,जनसम्पर्क अधिकारी डॉ.शिवकुमार चौहान,डॉ.विपुल भट्ट,नोडल सुरक्षा दुष्यंत सिंह राणा,डॉ.मनोज कुमार,मदनलाल जाट,प्रवीण कुमार,राजवीर सिंह, सहित विभिन्न संकायों के प्राध्यापक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।स्वामी श्रद्धानंद के जीवन पर बनी डाक्यूमेंट्री का भी छात्र-छात्राओं के लिए प्रसारण किया गया।वैदिक प्रार्थना एवं शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। ऋषिहुड विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्रों ने गुरुकुल के अनुभव को जीवनोपयोगी एवं समस्या समाधान का सबसे सटीक एवं व्यापक उपक्रम बताया।
