सहारनपुर। यूपीआई पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क व्यवस्था को वापस लेने के संबंध में आज उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मण्डल की जिला इकाई से जुड़े व्यापारियों ने आज केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन भेजकर यूपीआई पर शुल्क वापिस लेने की मांग की।
ज्ञापन में जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन ने बताया कि यूपीआई अर्थात ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ आज भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को डिजिटल और कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने हेतु व्यापारियों एवं नागरिकों को लगातार प्रोत्साहित किया है। देश के व्यापारियों ने भी इस आह्वान पर विश्वास दिखाते हुए यूपीआई को अपनी दुकानों एवं प्रतिष्ठानों पर अपनाया और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जनता तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज स्थिति यह है कि बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों से लेकर सब्जी बेचने वाले, फल विक्रेता, पान की दुकान, चाय की दुकानकृहर छोटे दुकानदार तक यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने ज्ञापन में बताया कि आम जनता ने भी इसे अपने दैनिक जीवन की सहज भुगतान व्यवस्था के रूप में स्वीकार कर लिया है और इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में यूपीआई के कुछ व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने की नई व्यवस्था ने व्यापारियों में गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। हमारी स्पष्ट मान्यता है कि 96 प्रतिशत या 4 प्रतिशत का तर्क हमारे लिए पर्याप्त नहीं है। व्यापार मण्डल का कहना है कि एक भी व्यापारी या उपभोक्ता पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ या इस तरह की नई लागत नहीं आनी चाहिए। इससे व्यापारी और ग्राहक के बीच अनावश्यक भ्रम और टकराव की स्थिति बन सकती है। वर्तमान में यूपीआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में इस व्यवस्था में शुल्क लागू करना उसके सहज चलन में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न कर सकता है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के सरकारी उद्देश्य के अनुरूप यूपीआई को और सरल, सुविधाजनक और शुल्क-मुक्त रखना ही उचित होगा। हम पुरजोर मांग करते हैं कि प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क व्यवस्था को तत्काल वापस लिया जाए।
व्यापार मण्डल को पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार करोड़ों व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं की भावनाओं और वास्तविक कठिनाइयों को समझते हुए इस गंभीर विषय पर सकारात्मक निर्णय लेगी और डिजिटल भारत की भावना को मजबूत करेगी। यदि यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी वर्ग अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलन का मार्ग अपनाने के लिए विवश होगा, क्योंकि हमारे पास अपने अधिकारों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए इसके अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचेगा। ज्ञापन देने वालों में शीतल टण्डन, जिला महामंत्री रमेश अरोडा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिडढा, मेजर एस.के.सूरी, पवन कुमार गोयल, रमेश डावर, संजय महेश्वरी, संदीप सिंघल, अभिषेक भाटिया, अशोक मलिक शामिल रहे।
