सहारनपुर 15 सितम्बर। उ.प्र.उद्योग व्यापार मण्डल की जिला इकाई द्वारा प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाये जाने वाले हिन्दी दिवस के कार्यक्रमों की श्रृंखला में गत देर सांय किशनपुरा मेडिकल मार्किट में आयोजित कार्यक्रम में जनपद के लोकप्रिय कवि, समाजसेवी व वरिष्ठ व्यापारी प्रतिनिधि सतीश ठकराल का अंगवस्त्र, पुष्प व पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन ने कहा कि देश की जनभाषा हिन्दी है जो देश के प्रत्येक भाग में बोली व समझी जाती है लेकिन आज हमारे सामने चुनौती बनी है कि हिन्दी को उसके उचित एवं गौरवशाली सिंहासन पर कैसे स्थापित रखा जाये। भारत की विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों में सामंजस्य बनाये रखने में भी हिन्दी सेतु स्वरूपा है। उन्होंने कहा कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा में हिन्दी को राजभाषा के रूप मंे अपनाये जाने का निर्णय लिया गया था, तभी से इस दिन हिन्दी के प्रचार प्रसार के लिए प्रत्येक वर्ष हिन्दी दिवस मनाया जाता है।
श्री टण्डन ने कहा कि विश्व की की दूसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा चीनी के बाद हिन्दी ही है। पूरे विश्व मेें 60 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, लिखते व पढ़ते है, और देश में 55 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते हैं। 85 से 90 प्रतिशत लोग हिन्दी समझते है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि श्री मोदी जो हिन्दी को जो सम्मान देने का कार्य कर रहे हैं वह अति सराहनीय एवं अभिनदंनीय है। उन्होंने 10 वर्ष पूर्व संयुक्त राष्ट्रसंघ में और 3 वर्ष पूर्व दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में अपना भाषण हिन्दी में दिया था और विदेशों में तथा देश में आने वाले विदेशी मेहमानों के साथ वे अक्सर हिन्दी में ही बात करते हैं। हिन्दी को यह सम्मान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 4 अक्टूबर 1977 को संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के विदेशमंत्री के रूप में हिनदी में भाषण दिया गया था। श्री टण्डन ने कहा कि भाषा वैज्ञानिक मानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय भाषा में हिन्दी का विशेष सम्मान होगा। उन्होंने आहवान किया कि हम अपने दैनिक जीवन के व्यवहार में भी हिन्दी को अपनाये यह भी याद रखें कि यह एक गौरवशाली भाषा है और इसे गौरवशली बनाने का आंदोलन महात्मा गांधी व स्वामी दयानंद जैसे हिन्दी भाषियों द्वारा शुरू किया गया। दुनिया के सबसे बडे़ लोकतंत्र भारत में वेशभूषा वर्ग, जाति, भाषा, संस्कृति की विविधता होते हुए भी भारत को एकजुटता को बनाये रखने में हिन्दी का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि संविधान में हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया था लेकिन उसी के साथ अंग्रेजी को भी 15 वर्ष के लिए सहायक भाषा का दर्जा दिया था। उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए अन्जान नहीं है हिन्दी, नए दौर और बढ़ते दायरे की है हिन्दी और जो दिलों को जोड़े वही भाषा है हिन्दी, हिन्दी हृदय की भाषा है। श्री टण्डन ने कहा कि उन्हें गर्व है कि 1967 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले चले हिन्दी आंदोलन में उन्होंने बड़ी संख्या में अपने साथियों के साथ गिरफ्तारी दी थी और तीन दिन तक सहारनपुर जेल में भी रहे।
जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा व मुख्य संरक्षक मेजर एस.के.सूरी ने कहा कि भारत एक भूभाषीय राष्ट्र है, जहां डेढ़ दर्जन भाषाएं प्रचलित हैं, किन्तु देश के सम्पूर्ण जनमानस को राष्ट्रीय दृष्टि से जागृत करने में हिन्दी भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका विशेष उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि हिन्दी सिनेमा में भी हिन्दी के प्रचार तथा प्रसार गीतों व संगीत के माध्यम से हिन्दी को लोकप्रिय बनाने में वर्षों से लोकप्रिय स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को विश्वस्तर पर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से भी भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। पूरे विश्व की सभी भाषाओं में हिन्दी साहित्य अपना विशेष स्थान रखता है।
बैठक में प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन, जिला महामंत्री रमेश अरोडा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, नितिन ठकराल, विनोद बजाज, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *