महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद हाजी फज़लुर्रहमान व कानूनी विशेषज्ञों से की चर्चा
दस्तावेजों व साक्ष्यों के आधार पर हाई कोर्ट समेत उच्च न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाएगी जमीयत
अजीम अख्तर
दैनिक मानव जगत
सहारनपुर। ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट मस्जिद के विध्वंस के बाद उपजे हालात का जायजा लेने के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा। संगठन के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में आए दल ने मस्जिद से संबंधित कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक स्थिति की समीक्षा की।
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद हाजी फज़लुर्रहमान, वाद से जुड़े फिरोज खान, शाह हारून खान, एडवोकेट नौशाद और पक्षकार एडवोकेट तनवीर अहमद समेत पदाधिकारियों से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। कानूनी विशेषज्ञों के साथ बैठक में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों व अदालती आदेशों के तकनीकी पहलुओं की जांच की गई, जिसमें फैसले के आधार बने दस्तावेजों और भूमि के वास्तविक स्वामित्व को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
मीडिया से बातचीत में मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कार्रवाई पर दुख जताते हुए कहा कि प्रभावित पक्ष को कानूनी बचाव का मौका दिए बिना जल्दबाजी में बुलडोजर चलाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद न्याय के लिए हर कानूनी दरवाजे पर दस्तक देगी और सहारनपुर के लोगों को पूरी संवैधानिक व कानूनी सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने शांति व आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए शहरवासियों की सराहना भी की।
केंद्रीय दल में मौलाना कासिम नूरी (अध्यक्ष जमीयत दिल्ली), मौलाना अली हसन मजाहिरी (अध्यक्ष जमीयत हरियाणा, पंजाब, हिमाचल), सचिव मौलाना अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी, मौलाना यूसुफ कासमी और हाफिज अबूबकर शामिल रहे। वहीं स्थानीय स्तर पर जिलाध्यक्ष मौलाना गुलफाम मजाहिरी, मौलाना सरताज अहमद कासमी, मौलाना अतहर और मौलाना फरीद मजाहिरी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
