अखाड़ों में उत्साह,कुंभ मेले के भव्य आयोजन को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को सराहा
हरिद्वार।आगामी वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा संत समाज एवं अखाड़ों के साथ निरंतर संवाद स्थापित किया जा रहा है।संतों के मार्गदर्शन एवं सुझावों के अनुरूप कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।कुंभ मेला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा विभिन्न अखाड़ों के प्रमुखों, महामंडलेश्वरों,महंतों एवं साधु-संतों से भेंटकर मेले के सफल आयोजन को लेकर सुझाव एवं मार्गदर्शन प्राप्त किए जा रहे हैं।राज्य सरकार द्वारा अखाड़ों एवं संत समाज के मार्गदर्शन में कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।कुंभ केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं,बल्कि सनातन संस्कृति,आध्यात्मिक परंपरा और संत परंपरा का विराट उत्सव है।इसी भावना के अनुरूप कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में संत समाज की गरिमा, सुविधाओं एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है।मेला प्रशासन के अधिकारी संत समाज के साथ निरंतर संवाद कर व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।अधिकारियों द्वारा श्रीनिरंजनी अखाड़ा,श्रीजूना अखाड़ा,श्रीपंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, श्रीपंचायती अटल अखाड़ा,श्रीपंचायती आनंद अखाड़ा,श्रीपंचअग्नि अखाड़ा,श्रीपंचदशनाम आवाहन अखाड़ा,श्रीपंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन,श्रीपंचायती उदासीन नया अखाड़ा ,श्रीपंचायती निर्मल अखाड़ा,श्री निर्वाणी अणि अखाड़ा,श्रीदिगम्बर अणि अखाड़ा एवं श्रीनिर्माेही अणि अखाड़ा के प्रमुख संतों एवं पदाधिकारियों से भेंट कर कुंभ आयोजन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।इस दौरान अखाड़ों के प्रमुख संतों एवं पदाधिकारियों द्वारा कुंभ मेले के दौरान होने वाले अमृत स्नान,पेशवाई,अखाड़ों की आवासीय व्यवस्थाओं,यातायात प्रबंधन,सड़क एवं पुलों के निर्माण व रखरखाव,घाटों की व्यवस्थाओं,स्वच्छता,विद्युत,पेयजल,सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।संत समाज ने सुझाव दिया कि कुंभ मेले की आध्यात्मिक गरिमा एवं धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करते हुए आधुनिक सुविधाओं का बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके और कुंभ की प्राचीन परंपराएं भी अक्षुण्ण बनी रहें।अखाड़ों के प्रमुखों एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सरकार एवं मेला प्रशासन द्वारा प्रारंभिक चरण से ही संवाद स्थापित कर सुझाव लिए जाने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज को साथ लेकर तैयार की जा रही व्यवस्थाओं से कुंभ मेले का आयोजन अधिक प्रभावी,सुव्यवस्थित एवं सफल होगा।

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