हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पंड्या ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकी विकास के साथ ही मानव सभ्यता के भविष्य को दिशा देने वाली शक्ति बन चुकी है।उन्होंने कहा कि यदि एआई को मानवीय संवेदनाओं,नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ा जाए, तो यह विश्व में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। देसंविवि के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने बिहार के पटना में शिक्षा,प्रशासन,प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी तकनीक के माध्यम से विश्व को बदलने की क्षमता रखती है,लेकिन इसके साथ आत्मसंयम,विवेक और सामाजिक उत्तरदायित्व भी उतना ही आवश्यक है।देसंविवि का उद्देश्य कुशल पेशेवर के साथ ही ऐसे जागरूक नागरिक तैयार करना है जो धर्म,संस्कृति और विज्ञान के संतुलन को समझते हों।एआई विशेषज्ञ डॉ पण्ड्या ने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच शिक्षा व्यवस्था को भी मूल्यनिष्ठ और मानवीय बनाना समय की मांग है।उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक का उपयोग मानव जीवन में करुणा,सहयोग और सद्भाव बढ़ाने के लिए ही होना चाहिए।उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक को केवल करियर का माध्यम न मानें,बल्कि समाज सेवा,राष्ट्र निर्माण और वैश्विक कल्याण के उपकरण के रूप में अपनाएँ।इस अवसर पर उपस्थित सांसद रविशंकर प्रसाद,नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.सचिन चतुर्वेदी,स्ट्रेटेजिक फॉरसाइट ग्रुप के संस्थापक संदीप वासलेकर तथा बिहार के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव आदि ने भी अपने अपने विचार रखे। अतिथियों को देसंविवि द्वारा तैयार किया गया हस्तनिर्मित जूट बैग एवं पूज्य गुरुदेव का साहित्य भेंट किया।इस दौरान युवा प्रकोष्ठ पटना के मनीष कुमार,वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती प्रीति आनंद गुप्ता सहित राज्य के कोने कोने से आये युवा शामिल रहे।

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