भगवान बुद्ध के बताए रास्तों को करें आत्मसात: गौतम

(वीर वालिया)
सहारनपुर। शाकंभरी मार्ग स्थित सिद्धार्थ नगर नागल माफी के बुध विहार में बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर भव्य दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति, करुणा और भाईचारे का संदेश देना रहा। दिल्ली से आए मुख्य अतिथि धर्मेंद्र गौतम ने कहा कि भगवान बुद्ध के उपदेश आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है, तब बुद्ध के विचार मानवता को सही दिशा दिखा सकते हैं। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे बुद्ध के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और समाज में सद्भावना का वातावरण बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान बीर सिंह आचार्य ने लगभग 500 श्रद्धालुओं को विधिवत दीक्षा दिलाई। इस दौरान उपस्थित लोगों में विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिला। दीक्षा ग्रहण करने वालों ने बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का पालन करने और एक सच्चे, शांतिप्रिय जीवन जीने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर धार्मिक वातावरण के बीच मंत्रोच्चार और अनुशासित व्यवस्था ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। आयोजक वीर सिंह कुंडलीवाल ने कहा कि यह दीक्षा कार्यक्रम शुक्रवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि लोगों में बौद्ध धर्म के प्रति गहरी आस्था है। कार्यक्रम का संचालन हरिदास पाल ने कुशलतापूर्वक किया, जिससे पूरे आयोजन में अनुशासन और सुव्यवस्था बनी रही। यह आयोजन जेतवन अनाथ पिंडक बुद्ध विहार, नागल माफी में भगवान बुद्ध के 2588 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर आगमन की स्मृति में किया गया। कार्यक्रम के समापन के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें सभी श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे और आयोजन की सराहना की। पूरे कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।
इस दौरान शेषराज पंवार, ईश्वर चंद, एसपी आर्य, रेखा, मधु सहगल, सीमा बौद्ध, सुखपाल भास्कर, मेवा लाल, पहल सिंह, उर्मिला बौद्ध हरिदास पाल, सुल्तान सिंह आदि मौजूद रहे।

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