हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के दयानंद स्टेडियम प्रांगण के मेजर ध्यान चन्द सभागार मे प्रशिक्षुओं को खेल जगत की महान विभूतियों एवं उनके योगदान पर बी.पी.ई.एस.द्वितीय वर्ष के छात्रों के साथ ओपन चर्चा हुई। निशानेबाजी के जनक डॉ.करणी सिंह की जयंती तथा खेलों मे उनके योगदान पर चर्चा का आयोजन किया गया।चर्चा का संयोजन डॉ.शिवकुमार चौहान ने किया।डॉ.चौहान ने बताया कि भारतीय खेल जगत का इतिहास किस्से,कहानियों एवं प्रतिभाओं की अनन्त उपलब्धियों से भरा हुआ है जिसमें परिश्रम,त्याग एवं विषमताओं की अनमिट दास्तान एवं नये मानक स्थापित कर चरमोत्कर्ष प्राप्त करना है।ऐसी अद्वितीय प्रतिभाओं मे निशानेबाजी को अपनी विरासत कुशलता के साथ एक नई शैली मे खेल के रूप मे प्रतिस्थापित करने तथा अपने प्रदर्शन से भारत ही नहीं अपितु विश्व मे ख्याति एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करने तथा निशानेबाजी के जनक कहे जाने वाले डॉ.करणी सिंह का जन्म 21अप्रैल 1924 को बीकानेर मे हुआ।वे बीकानेर रियासत के अंतिम महाराजा रहे। 17 बार नेशनल चैंपियन रहे करणी सिंह ने 5 बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले निशानेबाज बने।21अप्रैल 1924 को जन्मे वे महाराजा सादुल सिंह के बेटे और जनरल सर गंगा सिंह के पोते थे उन्होंने अपनी शिक्षा दिल्ली और बीकानेर से प्राप्त किए और बॉम्बे विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की। निशानेबाजी में 1952से 1976 तक लगातार 5 बार ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया।उन्होंने 1962वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीता था।उन्होंने 1952से 1977तक बीकानेर से लोकसभा सांसद के रूप में निर्दलीय चुनाव लड़ा और लगातार 25वर्षों तक संसद के सदस्य रहे। उनका निधन 6सितंबर 1988 को हुआ।चर्चा उनके नाम पर दिल्ली मे डॉ.करणी सिंह शूटिंग रेंज स्थापित है।जिसमे अभ्यास के बाद जसपाल राणा,गगन नारंग,अभिनव बिन्द्रा, राज्यवर्धन सिंह राठौर जैसे कीर्ति प्राप्त खिलाडियों ने गौरव प्राप्त किया है।चर्चा के उपरान्त डॉ.करणी सिंह को प्रशिक्षु छात्रों द्वारा विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई।चर्चा मे शिवांश अग्रवाल,वंश कुमार,आर्यन प्रसाद, लक्षित कुमार,लवी कुमार,अनिरुद्ध भटट,नीरज गौतम,अनुराग सिंह,हिमांशु कुमार,अंश मलिक ,विपिन सिंह रावत,नमन त्यागी,आर्यन बालियान आदि प्रमुख रहे।
