नईदिल्ली,21 जनवरी । केंद्र सरकार देश में एक रीजनल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट विकसित करने के लिए एक खास कंपनी यानी स्पेशल पर्पस व्हीकल (एसपीवी) बनाने की योजना पर काम कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर करीब 12,511 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सबसे अहम बात यह है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा विमान के डिजाइन से ज्यादा उसके सर्टिफिकेशन, टेस्टिंग और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा, जिससे सिविल विमान निर्माण की जटिलता साफ दिखती है।
प्रस्तावित एसपीवी को एक डेडिकेटेड प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया जाएगा, जो पूरे एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट को डिजाइन से लेकर सर्टिफिकेशन और फिर प्रोडक्शन तक आगे बढ़ाएगा। इसका मकसद सरकारी सहयोग, तकनीकी भागीदारों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को एक साथ लाना है। केंद्र सरकार इस एसपीवी के जरिए फंडिंग, साझेदारी और कामकाज के बेहतर तालमेल को सुनिश्चित करना चाहती है, ताकि जिम्मेदारियां अलग-अलग एजेंसियों में बंटने से बच सकें।
इस प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका भी अहम होगी। डिजाइन, सर्टिफिकेशन और फ्लाइट टेस्टिंग के लिए एक विदेशी नॉलेज पार्टनर को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिस पर करीब 750 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विमान वैश्विक सुरक्षा मानकों पर खरा उतरे। खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सर्टिफिकेशन के लिए विदेशी अनुभव और तकनीकी सलाह को जरूरी माना जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार, सिर्फ सर्टिफिकेशन पर ही 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। इसमें हजारों घंटे की ग्राउंड और फ्लाइट टेस्टिंग, दस्तावेजीकरण और अलग-अलग परिस्थितियों में विमान की सुरक्षा जांच शामिल है। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोटोटाइप, सिस्टम और स्वदेशीकरण पर भी बड़ी राशि रखी गई है। यह दिखाता है कि एक सुरक्षित और भरोसेमंद यात्री विमान तैयार करना कितना समय लेने वाला और महंगा काम होता है।
