हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय कन्या कौशल शिविर का शनिवार को समापन हो गया।समापन से पूर्व बालिकाओं ने शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। शिविर में जम्मू-कश्मीर के सुंदरबनी सहित विभिन्न स्थानों से आई बालिकाओं एवं उनके अभिभावकों ने भाग लिया।शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंटकर उनका आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया।इस अवसर पर अपने संदेश में श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि कन्याओं के सर्वांगीण विकास,आत्मविश्वास,संस्कार एवं कौशल संवर्धन के लिए ऐसे शिविर अत्यंत उपयोगी हैं।उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण,सांस्कृतिक मूल्यों तथा आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण भी समय की आवश्यकता है।समापन सत्र को संबोधित करते हुए शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री वीरेन्द्र तिवारी ने कहा कि बेटियाँ समाज और संस्कृति की रीढ़ हैं।युग निर्माण की इस पावन वेला में उनका सुसंस्कृत एवं कौशल -संपन्न होना अनिवार्य है।उन्होंने बालिकाओं को जीवन में निरंतर आगे बढऩे तथा गायत्री परिवार के हम बदलेंगे,युग बदलेगा के संकल्प को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया।इससे पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत समूह नृत्य,जम्मू की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों,देशभक्ति गीतों एवं प्रेरणाप्रद प्रज्ञा गीतों की प्रस्तुति दी गई।प्रतिभागी बालिकाओं ने शिविर के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए इसे जीवनोपयोगी बताया।तीन दिनों तक चले इस शिविर में बौद्धिक सत्रों के साथ दैनिक दिनचर्या में यज्ञ,योग,प्राणायाम एवं ध्यान को भी शामिल किया गया।शिविर के दौरान गायत्री और यज्ञ का ज्ञान-विज्ञान,जीवन लक्ष्य और हमारे आदर्श तथा व्यक्तित्व विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या,गायत्री विद्यापीठ की प्रबंधन समिति की अध्यक्षा श्रीमती शैफाली पण्ड्या सहित शांतिकुंज के विषय विशेषज्ञों ने बालिकाओं का मार्गदर्शन किया।

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