हरिद्वार। ईदगाह रोड़ ज्वालापुर स्थित मदरसा दारुल उलूम रशिदिया में मदरसों को लेकर बैठक आयोजित की गई।मदरसा प्रबंधक मौलाना आरिफ ने कहा कि मदरसा शिक्षा को लेकर भ्रम फैलाकर मदरसों को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ धार्मिक शिक्षा भी जरूरी है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर बच्चे हाफिज, कारी और मौलवी मौलाना बनकर मस्जिदों और मदरसों में तालीम देते हैं और धार्मिक शिक्षा का प्रचार करते हैं।उन्होंने कहा कि जो लोग मदरसों के नाम पर मॉडर्न शिक्षा देकर मिड डे मील एवं अन्य सुविधाएं हासिल कर घपला रहे हैं,उनकी जांच होनी चाहिए। मौलाना आरिफ ने कहा कि वर्षों से मदरसे देश में संचालित हैं।देश की आजादी के आंदोलन में भी मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों एवं युवाओं का विशेष योगदान है।देश को आजादी दिलाने में अनेकों बलिदान दिए गए।उन्होंने कहा कि मदरसों में देश के प्रति कर्तव्यों को भी सिखाया जाता है। मदरसों में पढ़ने एवं पढा़ने वालों ने सरकार के खिलाफ कभी कोई काम नहीं किया है। मदरसों में सच्ची निष्ठा,ईमानदारी,धर्म के प्रति समर्पित भावना का पाठ पढ़ाया जाता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मदरसा शिक्षा एवं मॉडर्न शिक्षा में अंतर को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि मदरसे सरकार से कोई मदद नहीं ले रहे हैं।चंदे के पैसे से मदरसों में शिक्षा देने का काम किया जा रहा है।वर्ष भर का ऑडिट भी किया जाता है।किसी भी प्रकार का घपला नहीं होता है।इसलिए सरकार द्वारा गठित किए जा रहे प्राधिकरण या बोर्ड की कोई आवश्यकता नहीं है।मास्टर साजिद हसन ने कहा कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों को मदरसों में बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।उन्होंने कहा कि बिना सोचे समझे मदरसों की शिक्षा को बदनाम ना करें।इस दौरान मास्टर इसरार,मास्टर रिजवान,कारी बसीर, मास्टर साजिद हसन,कारी असद आदि मौजूद रहे।

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