लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सरकार ने दिल्ली से सटे नोएडा में कर्मचारियों के आंदोलन के बाद बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पूरे राज्य की न्यूनतम मजदूरी में बदलाव किया है और इसे 10 से 21 प्रतिशत तक बढ़ाया है। बढ़ा हुआ वेतन 1 अप्रैल से लागू होगा। मुख्यमंत्री योगी ने आंदोलन के बाद मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई थी, जिसकी सिफारिश पर न्यूनतम वेतन बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
वेतन बढ़ोतरी को 3 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें नोएडा और गाजियाबाद, अन्य नगर निगम वाले जनपद और अन्य जिले शामिल हैं। नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों की अंतरिम देय मजदूरी (मूल वेतन और मंहगाई भत्ता समेत) 21 प्रतिशत बढ़ाया गया है, जो सबसे अधिक है। अब यहां अकुशल श्रमिकों को 13,690 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मिलेंगे, जो पहले क्रमश: 11,313 रुपये, 12,445 रुपये और 13,940 रुपये थी।
अन्य नगर निगम वाले जनपदों में अकुशल श्रमिकों को 13,006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 14,306 रुपये और अर्धकुशल श्रमिकों को16,025 रुपये दिए जाएंगे। अन्य जनपदों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये दिए जाएंगे। नगर निगम वाले जनपद और अन्य जनपदों में अभी तक श्रमिकों को क्रमश: 11,313 रुपये, 12,445 रुपये और 13,945 रुपये मिलता है।
कर्मचारियों के आंदोलन के बाद सोशल मीडिया पर खबर आई थी कि सरकार ने सभी कर्मचारियों का वेतन 20,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है, जिसे सरकार ने फर्जी बताया है। सरकार का कहना है कि श्रमिक और उद्योग के बीच संतुलन बनाकर फैसला लिया गया है और न्यूनतम वेतन में अंतरिम बढ़ोतरी की गई है। बताया जा रहा है कि श्रम संहिता लागू होने के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है।
नोएडा में सोमवार को कई कंपनियों के कर्मचारियों ने जबरदस्त हंगामा खड़ा कर दिया। उन्होंने सड़क पर कई कंपनियों में तोड़फोड़ की और उन्हें बंद कराया। इस दौरान करीब एक हजार वाहनों को नुकसान पहुंचा गया और कई गाड़ियों में आगजनी की गई। पुलिस ने अभी तक 60 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है और 250 से अधिक हिरासत में हैं। नोएडा में आंदोलन के दौरान पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े थे।

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