हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में बौद्धिक सम्पदा अधिकार पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हो गया।इस अवसर पर भारतीय पेटेंट कार्यालय (आई.पी.ओ.) के पूर्व संयुक्त नियंत्रक डा.बी.पी.सिंह ने अपने ब्याख्यान में कहा कि 2014-15 के बाद से भारत में पेटेंट पंजीकरण के प्रति देश में एक सकारात्मक माहौल बना है,जिस से हर वर्ष बौद्धिक सम्पदा अधिकार से सम्बंधित पेटेंट,डिजाईन,ट्रेड मार्क एवं कॉपी राईट पंजीकरण में भारी मात्र में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है जो देश के आर्थिक एवं वैज्ञानिक उत्थान के लिए सकारात्मक संकेत हैं।उन्होेने कहा कि जब हम अपने किसी आविष्कार, रचनात्मक कृति या यन्त्र आदि का पेटेंट करते हैं तो आविष्कार के अधिकार संरक्षित हो जाते हैं जिस से उसका व्यावसायीकरण होने से आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं जो ब्यवसाय एवं अनुसंधान में गति प्रदान करता है। उन्होंने भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र का उदहारण देते हुए कहा कि भारत विश्व का फार्मेसी हब है और हम विश्व में सर्बाधिक दवा निर्माण एवं निर्यात करते हैं जिस से विश्व की औषधीय जरूरतों की पूर्ती होती है।उन्होंने भारत में बौद्धिक सम्पदा के इतिहास का ब्यौरा देते हुए कहा कि 1995 से पहले भारत में बहुत कम संख्या में पेटेंट के दावे प्राप्त होते थे,जो आज 2025-26सैकड़ों गुना बढ़ चुका है।उन्होंने कहा कि यह सुखद अनुभूति है,उन्होंने अमेरिका का उदहारण देते हुए बताया कि वहां कि अर्थ ब्यवस्था शोध एवं अनुसंधान पर आधरित है,जिस से वह विश्व की सर्बाधिक विकसित अर्थ ब्यवस्था है।उन्होंने प्रतिभागियों को पूर्व राष्ट्रपति डा.कलाम के शब्दों को याद कराया कि“बड़ा सपना देखो”और उस को पाने के लिए कुशलता पूर्ण मेहनत करो,और यह वैज्ञानिक शोध एवं अनुसन्धान एवं उनके पंजीकरण व उस से प्राप्त आर्थिक लाभ से ही संभव होगा।इस अवसर पर अपने ब्याख्यान पर बोलते हुए फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री शाकाहा के प्रभारी डा.कपिल कुमार गोयल ने भारत में पेटेंट,उनके प्रकार, डिजाईन, ट्रेड मार्क कॉपी राईट उनके फाइल करने के तरीके एवं देश में कॉपी राईट एवं ट्रेड मार्क पेटेंट आदि के उल्लंघन के मामलों की विस्तृत चर्चा की,कहा कि हम जो बौधिक नवाचार या लेखन,रचनात्मकता करते हैं उसका बौद्धिक सम्पदा एजेंसी से पंजीकरण अवश्य करवाना चाहिए,उन्होंने संगीत,प्रकाशन,डिजाईन एवं फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के अनेक चर्चित कॉपी राईट उल्लंघन मामलों का उद्धरण देते हुए बताया कि कैसे समय से पंजीकृत एवं संरक्षित अधिकारों ने उनके बौद्धिक सम्पदा को न सिर्फ बचाया बल्कि इसका उल्लंघन करने वालों को कठोर आर्थिक दंड भी दिलवाया कहा कि हम जब भी कोई अपना नया काम करते हैं और उसमे कोई रचनात्मकता से कुछ नयापन लाते हैं जिस से वह पहले से चली आ रही चीजों से बहुत उपयोगी एवं लाभदायी होता है तो हमें अवश्य ही उसे बौद्धिक सम्पदा के तहत पंजीकृत करवाना चाहिए ताकि उसका कोई दुरपयोग न कर सके और आपके नैतिक,बौद्धि एवं आर्थिक लाभ संरक्षित रहें।उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि सभी को अपनी रचनात्मक बौद्धिक सम्पदा को आज से ही पंजीकरण एवं रंरखित करना चाहिए,ताकि यह देश के आर्थिक उन्नति में भागीदार साबित हो सके।इस दौरान कार्यशाला के संयोजक सचिव एवं विभागाध्यक्ष प्रो.सत्येन्द्र कुमार राजपूत ने राष्ट्रीय कार्यशाला हुई गतिविधियों का विस्तृत ब्यौरा रखते हुए बताया कि इसमें देश भर से 200 से ज्यादा प्रतिभ्गियों ने प्रतिभाग किया एवं बौद्धिक सम्पदा से सम्बंधित विभिन विशेषज्ञों के 10 ब्याख्यान हुए और साथ ही हैण्ड ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुप्रयोगात्मक ज्ञान को संवर्धित किया।विभाग के शिक्षक विनोद नौटियाल ने सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों,कार्यशाला के प्रायोजकों एवं विश्वविध्यालय के प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर डा.विपिन कुमार,डा.अश्वनी कुमार,डा.बलवंत सिंह रावत,डा.दीपक सिंह नेगी डा.पीयूष सिंघल डा.पिं्रस प्रशांत शर्मा,हरेन्द्र मालिक,जतिंदर कुमार,रोशन लाल,अनुज त्यागी,आनंद कुमार,संजय आदि का सहयोग एवं उपस्थित रहे।

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