नई दिल्ली ,29 जनवरी। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर जारी तनाव कम होता नजर आ रहा है। बुधवार को शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिए कि दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं में बेहद अहम प्रगति हुई है और जल्द ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। सूत्रों के हवाले से बताया कि जहां भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते को लेकर राजनीतिक सहमति बन चुकी है, वहीं भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ के साथ समझौते के अंतिम दौर के दौरान भारतीय वार्ताकार लगातार संपर्क में रहे। इसी दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों (स्ञ्जक्र) के साथ भी समानांतर बातचीत चलती रही। भारत ने अपनी ओर से प्रस्ताव रख दिए हैं और अब इस समझौते को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अमेरिका पर है।
गेंद अब अमेरिका के पाले में
सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बातचीत का वास्तविक स्वरूप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि और उनकी टीम को भली-भांति ज्ञात है, न कि उन लोगों को जो सार्वजनिक बयान दे रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट कहा, “भारत जो दे सकता था, वह दे चुका है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है।”
द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौतों पर ज़ोर
सूत्रों ने बताया कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एमएफएन-आधारित व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के चलते देश अब प्रमुख साझेदारों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत का दृष्टिकोण किसी एक समझौते को दूसरे का विकल्प मानने के बजाय, समझौतों के एक व्यापक नेटवर्क के ज़रिये निर्यातकों और निवेशकों को बड़े बाज़ारों तक पहुंच और स्थिरता प्रदान करना है।
निर्यात और रोज़गार बढ़ाने पर फोकस
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोपीय संघ और अमेरिका को परस्पर विरोधी व्यापारिक लक्ष्य के रूप में नहीं देखता। सरकार की प्राथमिकता दोनों क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की है, जिससे देश में रोज़गार सृजन और निवेश को बढ़ावा मिल सके। हालांकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की सटीक रूपरेखा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों ने बातचीत को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। संकेत हैं कि अमेरिका के साथ यह वार्ता सफलता के काफी करीब पहुंच चुकी है।

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