नई दिल्ली ,06 जनवरी। सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी के मामले में देवास्वोम बोर्ड के पूर्व सदस्य केपी शंकर दास को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शंकर दास ने केरल हाईकोर्ट के आदेश में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी।
जस्टिस दीपांकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि आपने भगवान को भी नहीं छोड़ा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि देवास्वोम बोर्ड के सदस्य के तौर पर शंकर दास की जिम्मेदारी बनती है और वे चोरी के मामले में अपनी भूमिका से पल्ला नहीं झाड़ सकते, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शंकर दास की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए केवल उस आधार पर नरमी बरती थी। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणियों को उचित ठहराते हुए उन्हें हटाने से इनकार कर दिया।
दरअसल, केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मामले में केपी शंकर दास और के विजयकुमार आपराधिक साजिश से बच नहीं सकते। हाईकोर्ट की इसी टिप्पणी को हटाने की मांग को लेकर शंकर दास ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार करने से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी।
सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर से कई किलो सोने की चोरी और कुछ कीमती सामानों के गायब होने की खबर मुख्य मुद्दा बनकर उभरी। यह सोना 1998-99 में यूबी ग्रुप के चेयरमैन विजय माल्या द्वारा दान की गई द्वारपाल मूर्तियों पर लगी परत का हिस्सा था। मामले में केरल हाईकोर्ट के दखल के बाद एक उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी।
जांच के बाद एन. वासु और ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया, जो त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी के वरिष्ठ नेता हैं। इन गिरफ्तारियों ने विपक्ष के इस रुख की पुष्टि की कि मंदिर प्रशासन का इस्तेमाल सत्ता केंद्रों के करीबियों द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा था, जिससे व्यापक साजिश की सीबीआई जांच की मांग उठी। सबरीमाला सोने की चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने अब तक वासु और पद्मकुमार सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

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