– हृदय और ब्लड़ प्रेशर रोगियों को सुबह चार से दस बजे का समय खतरे वाला
– युवा भी हो रहे दिल के रोगी, चिकित्सकों की सलाह नियमित लें दवाएं

अभिमन्यु वालिया
सहारनपुर। बदलते मौसम में जरा सी लापरवाही जीवन पर भारी पड़ सकती है। वर्तमान में दिल और ब्लड़ प्रेशर के रोगियों में 30 फीसदी तक इजाफा हुआ है, जिला अस्पताल की ओपीडी के अलावा निजी चिकित्सकों यहां भी बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। खासकर युवाओं भी दिल की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए सुबह चार से दस बजे तक समय ज्यादा खतरे वाला है।
दरअसल, पिछले एक सप्ताह से मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखन को मिला है। बीते सात दिनों में हुई बारिश की वजह से सुबह और शाम की ठंड बढ़ गई है। पहाड़ी इलाकों में बर्फ पड़ने की वजह सुबह और शाम को ठंडी हवाएं चल रही है। दिन में धूप निकलने पर मौसम गर्म हो जाता है। ऐसे में लोग गर्म कपड़ों को उतार देते थे और सुबह एवं शाम की सर्दी में चपेट में आने से बीमार हो रहे हैं। वर्तमान में हृदय और ब्लड़ प्रेशर के रोगियों में इजाफा हुआ है।
जिला अस्पताल में 30 फीसदी तक दिल, ब्लड़ प्रेशर मरीज बढ़े हैं। इनके अलावा दमा, नजला, खांसी और बुखार के मरीजों में भी इजाफा हुआ है।
सहारनपुर के वरिष्ठ फिजीशियन डाक्टर संजीव मिगलानी, वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डाक्टर पीडी गर्ग और डॉक्टर अभिनव गर्ग का कहना है कि बुजर्गों के अलावा युवा भी हार्ट के रोगी हो रहे हैं। ऐसे में सावधानियां बरतने की जरूरत है। दिल और ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित दवाई लेनी चाहिए। खासकर बुजुर्गों को विशेष ध्यान रखना चाहिए ल। इसके साथ ही जरा सी भी तबीयत खराब होने पर चिकित्सक का परामर्श लेकर दवाई लेनी चाहिए।
क्योंकि जरा सी भी लापरवाही जीवन पर भारी पड़ सकती है। आइए बताते हैं किन-किन बातों का रखें ध्यान।
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सुबह चार से दस बजे तक होता केटीकोलीमिन हारर्मोंस का रिसाव
सहारनपुर। हृदय और ब्लड प्रेशर के मरीजों को अपनी दिनचर्या, खानपान और दवाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हार्ट के मरीज
ज्यादा भारी काम नहीं करना चाहिए। सीढियों और चढ़ाई वाले रास्तों पर न चलें। खाना खाने के बाद थोड़ी देर आराम करें। सुबह चार से दस बजे तक केटीकोलीमिन हारर्मोंस का रिसाव होता है, जिससे हार्ट अटैक खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सुबह की सर्दी से बचकर रहें। ज्यादा गुस्सा, ध्रुमपान और शराब का सेवन न करें। चिकनाई वाले पदार्थ न खाएं। चिकित्सक के सलाह अनुसार ही दवा लें। सुबह सब्जी में इस्तेमाल किया तेल शाम को प्रयोग न करें। सीने में दर्द होने की स्थिति खून पतला होने वाली दवाई का सेवन करें। चिकित्सकों का कहना है कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम किया जा सकता है। बीपी के मरीजों को ब्लड प्रेशर की दवाई नियमित लेनी चाहिए और छोटी-छोटी का बातों का ध्यान रखेंगे तो ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहेगा।
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खानपान में सावधानियां
–नमक कम खाएं, अधिक नमक, अचार, पापड़, नमकीन और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
–तला-भुना कम करें, पूड़ी, पकौड़े, समोसे, फास्ट फूड और अधिक घी-मक्खन का सेवन सीमित रखें।
–हरी सब्जियां और फल खाएं, संतुलित मात्रा में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज लें।
–चीनी कम करें, मीठे पेय और अधिक मिठाइयों से बचें, खासकर यदि डायबिटीज भी हो।
–पानी उचित मात्रा में पिएं: यदि हार्ट फेलियर या किडनी की बीमारी है, तो डॉक्टर की बताई मात्रा का पालन करें।
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रोजमर्रा की दिनचर्या
–प्रतिदिन लगभग 7–9 घंटे की नींद लें।
–तनाव कम करने के लिए ध्यान, प्राणायाम या हल्की रिलैक्सेशन तकनीक अपनाएं।
–वजन नियंत्रित रखें और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
–धूम्रपान, तंबाकू और शराब से दूरी रखें।
–भारी व्यायाम या वजन उठाने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
–तेज गर्मी, अत्यधिक ठंड और अचानक बहुत मेहनत करने से बचें।
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बीपी के मरीजों के लिए जरूरी बातें
–घर पर नियमित रूप से बीपी मापें और रीडिंग लिखकर रखें।
–बीपी मापने से पहले पांच मिनट आराम करें और सही तरीके से मशीन का इस्तेमाल करें।
–डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद न करें और न ही खुराक बदलें।
–बीपी बार-बार अधिक या सामान्य से बहुत कम आने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
–चक्कर आने या कमजोरी महसूस होने पर बैठ जाएं या लेट जाएं और बीपी जांचें।
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हार्ट के मरीजों के लिए सावधानियां
–हृदय रोग की दवाएं समय पर लें।
–डॉक्टर की सलाह के अनुसार ईसीजी, इको और अन्य जरूरी जांच कराएं।
–सीने में दर्द, सांस फूलने या असामान्य थकान को नजरअंदाज न करें।
–दर्द की दवाएं, खासकर आइबुप्रोफेन या डाइक्लोफेनाक जैसी दवाएं, डॉक्टर से पूछे बिना न लें।
–यदि डॉक्टर ने एस्पिरिन या खून पतला करने की दवा दी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद न करें।
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किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल जाएं?

–सीने में दबाव या दर्द, खासकर यदि दर्द हाथ, पीठ, जबड़े या गर्दन तक जाए, अथवा पसीना और मतली आए।
–अचानक सांस फूलना या बेहोशी। इसे सामान्य कमजोरी समझकर न टालें।
–बीपी 180/120 या उससे अधिक तो एक मिनट आराम करके दोबारा मापें।

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