हरिद्वार। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को हरिद्वार शिवभक्ति में डूब गया।नगर के सभी पौराणिक शिवालयों में सुबह से ही जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।प्रशासन ने कांवड़ मेला 2026 के दृष्टिगत सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।जिलाधिकारी ने किया स्थलीय निरीक्षण सावन के पहले सोमवार के अवसर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने दक्षेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर मेला व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया।इस दौरान उन्होंने सेक्टर अधिकारियों और संबंधित विभागों को सुरक्षा,भीड़ प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं के सुचारु एवं पंक्तिबद्ध दर्शन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि सावन के पहले सोमवार पर बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर पहुंच रहे हैं।ऐसे में सभी अधिकारी पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ दायित्व निभाएं ताकि किसी श्रद्धालु को असुविधा न हो।उन्होंने बैरिकेडिंग,पेयजल,स्वच्छता,चिकित्सा और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं का भी जायजा लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने परिवार सहित दक्षेश्वर महादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक कर विधि- विधान से पूजा-अर्चना की।उन्होंने भगवान शिव से जनपद की सुख-समृद्धि, प्रदेशवासियों के कल्याण तथा कांवड़ मेला-2026 के सकुशल एवं शांतिपूर्ण संपन्न होने की कामना की।मंदिर परिसर में जिलाधिकारी ने उपस्थित शिवभक्तों को फल और पेयजल वितरित कर उनका स्वागत किया।उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए सुरक्षित एवं व्यवस्थित यात्रा की अपील की और स्वच्छता बनाए रखने के साथ प्रशासन का सहयोग करने का आग्रह किया ।इस दौरान प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी,सेक्टर अधिकारी तथा संबंधित विभागों के कर्मचारी उपस्थित रहे।नगर के शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब श्रावण के पहले सोमवार को केवल दक्षेश्वर ही नहीं,बल्कि नगर के सभी प्रमुख शिव मंदिर शिवनाम से गूंज उठे।बिल्केश्वर महादेव,दक्षेश्वर महादेव,नीलेश्वर महादेव,गौरी-शंकर महादेव,दरिद्रभंजन,तिलभांडेश्वर और हरिहर आश्रम स्थित पारदेश्वर महादेव सहित सभी मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु पहुंचे।विशेष रूप से बिल्केश्वर महादेव और दक्षेश्वर महादेव मंदिर के बाहर कई किलोमीटर लंबी कतारें लगीं।कांवड़ियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिक भी बड़ी संख्या में इन मंदिरों में पहुंचे।पौराणिक मान्यता के अनुसार बिल्केश्वर महादेव और दक्षेश्वर महादेव माता पार्वती तथा भगवान शिव की लीला स्थली रहे हैं।श्रावण मास में इन मंदिरों का विशेष महत्व है।मान्यता है कि श्रावण में भगवान शिव स्वयं कनखल में आकर विराजमान होते हैं और भक्तों का कल्याण करते हैं।इसी आस्था के चलते श्रद्धालु दूर-दूर से यहां जल चढ़ाने आते हैं। कुल मिलाकर श्रावण के पहले सोमवार ने हरिद्वार को एक बार फिर भक्ति, आस्था और व्यवस्था के संगम का उदाहरण बना दिया।
