हरिद्वार। भारत और ब्राजील के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में ब्राजील का 14सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज पहुँचा। दल सभी सदस्यों का भारतीय परंपरा के अनुरूप तिलक,अंगवस्त्र आदि कर आत्मीय स्वागत किया गया।प्रतिनिधिमंडल ने देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पण्ड्या से शिष्टाचार भेंट की।इस दौरान डॉ.पण्ड्या ने भारतीय ज्ञान परंपरा, योग, अध्यात्म, संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं से मेहमानों को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन वसुधैव कुटुम्बकम् है, जो संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। अंतरराष्ट्रीय संवाद वैश्विक सद्भाव, सांस्कृतिक समझ और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय परिसर में संचालित शैक्षणिक,शोध,योग,व्यक्तित्व विकास एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का अवलोकन किया।शांतिकुंज में संचालित आध्यात्मिक एवं रचनात्मक अभियानों तथा युगऋषि पं.श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों और युग निर्माण आंदोलन की जानकारी प्राप्त की। विदेशी मेहमानों ने भारतीय जीवन-दर्शन,योग एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षा के समन्वित स्वरूप की सराहना करते हुए इसे वैश्विक समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

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