हरिद्वार। मनोविज्ञान विभाग कन्या गुरुकुल परिसर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया गया। मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं व शिक्षकों द्वारा इस कार्यक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस वर्ष की थीम जीने के अनुभवों को सुना जाए,वास्तविक आवाज,वास्तविक परिवर्तन पर आधारित कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए।इस आशय के साथ कि हर किसी की एक कहानी है,छात्राओं ने अपने बचपन में हुई कई तरह की घटनाओं,उनके खेलने,पढ़ने व खट्टे मीठे अनुभवों को एक दूसरे से साझा किया और यह जाना कि हर किसी के जीवन में उतार-चढ़ाव रहे हैं किंतु अगर हम उन्हें एक दूसरे से साझा करें तो न केवल हम बहुत कुछ सीखते हैं,बल्कि हमारे मन का बोझ भी हल्का होता है।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मानसिक समस्याओं से ग्रसित व्यक्तियों के सार्थक रूप से जुड़ने और उनके ज्ञान को एक महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में मान्यता देने का अवसर है।इस वर्ष का अभियान यह आह्वान करता है कि उनकी आवाज उन नीतियों सेवाओं और दुनिया को आकर दे जो उनके जीवन को प्रभावित करते हैं मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से एकत्रित व्यक्तियों के अनुभवों को सही तरीके से सुना जाए वह और निर्णय में आवश्यक रूप से शामिल किया जाए तो मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों अधिक व्यक्ति केंद्रित अधिकार आधारित और लोगों की आवश्यकताओं और चिंताओं के प्रति संवेदनशील बनने की संभावना रखती है।सुनीता रानी ने छात्राओं को बताया कि अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि हम बुरे अनुभवों से सीखे और अच्छे अनुभवों से प्रेरित होकर अपने जीवन लक्ष्य के प्रति अग्रसित हो।साथ ही समय-समय पर होने वाले तनाव व विपरीत परिस्थितियों से उत्पन्न आत्मविश्वास की कमी को दूर करने में संचार व सहयोग का महत्वपूर्ण स्थान होता है।उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से गुजर रहे लोगों की बातें केवल सुनना ही काफी नहीं है बल्कि उन्हें समाज में बदलाव का माध्यम भी बनाना होगा। इसके साथ ही छात्रों को सहानुभूति पूर्ण श्रवण व मानसिक प्राथमिक चिकित्सा के गुण भी सिखाए गए।डॉ.ऋचा सक्सेना ने बताया कि मन की बात खुलकर साझा करना व आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी है।कार्यक्रम के दौरान विभाग की छात्राओं ने अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया।कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ.पारुल मलिक,दीपा साहू व शोध छात्रा मनिका गुप्ता की सराहनीय भूमिका रही।
