नई दिल्ली ,23 सितंबर । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग के भीतर महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि आयोग की आवश्यक मंजूरी के बिना कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। ये आरोप केजरीवाल ने एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आए कथित मतभेदों का हवाला देते हुए लगाए।
केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला चलाया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित पिछले कुछ वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग भी रखी। ये मांगें केजरीवाल की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में इन्हें उनकी मांगों के रूप में ही दर्ज किया गया है।
केजरीवाल ने कहा कि चुनाव आयोग केवल मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर नहीं बना है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो चुनाव आयुक्त होते हैं और आयोग के फैसले सर्वसम्मति अथवा बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। वर्तमान में निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त तथा सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि पिछले कुछ समय से ज्ञानेश कुमार अकेले ही आयोग चला रहे हैं और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने कई अवसरों पर लिखित रूप से आपत्तियां दर्ज कराई हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अन्य फैसलों से जुड़े मामलों में कई बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि एसआईआर सहित आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
केजरीवाल ने 28 अक्टूबर 2025 और अप्रैल 2026 में कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि सुखबीर सिंह संधू ने 28 अक्टूबर 2025 को आयोग की मंजूरी के बिना पत्र और आदेश जारी किए जाने पर सवाल उठाया था। उन्होंने 16 अप्रैल 2026 के कथित दो नोट और 24 अप्रैल को विवेक जोशी की ओर से लिखे गए पत्र का भी हवाला दिया।
केजरीवाल ने निर्वाचन आयोग से इन दस्तावेजों के अस्तित्व और उनमें दर्ज आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
केजरीवाल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के तहत किए गए सभी बदलाव वापस लेने तथा करीब तीन वर्ष पुरानी मतदाता सूची बहाल करने की मांग की।
निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर वर्तमान में एसआईआर-2026 से संबंधित मतदाता सूची और अंतिम एसआईआर सूची में नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
केजरीवाल ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संविधान और कानून के तहत निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को मतदाता सूची से संबंधित कार्यों का अधिकार है। उनका आरोप है कि ईआरओ की डिजिटल पहुंच सीमित कर दी गई है और दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालय से अधिकारी पूरे देश की मतदाता सूचियों में बदलाव कर सकते हैं।
केजरीवाल ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की शक्तियां सीमित करके मतदाता सूची तैयार करने का काम केंद्रीय स्तर पर किया जा रहा है तो इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
आप संयोजक ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 में किए गए कथित बदलावों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयुक्तों ने इन बदलावों को लेकर भी आपत्ति जताई है। केजरीवाल ने मांग की कि कथित बदलावों के आधार पर जोड़े गए नए मतदाताओं के नामों की भी समीक्षा की जाए और नियमों के विपरीत पाए जाने वाले बदलावों को निरस्त किया जाए।
केजरीवाल की तीन प्रमुख मांगें
पहली मांग: विशेष गहन पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया रद्द की जाए। इसके तहत किए गए बदलाव वापस लेकर करीब तीन वर्ष पुरानी मतदाता सूची बहाल की जाए।
दूसरी मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। केजरीवाल ने राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज करने की भी मांग की।
तीसरी मांग: दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में हुए चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराए जाएं।
केजरीवाल ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया का मुद्दा केवल विपक्षी दलों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, देश के प्रत्येक नागरिक को इस विषय पर सवाल उठाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में सरकार चुनने का अधिकार मतदाताओं को प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है। केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आगे आंदोलन सहित सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
 

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *