हरिद्वार। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन की नई दिशाओं पर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में मंथन होगा।हिंदी विभाग एवं शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में एक सितंबर को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और हिंदी भाषा-साहित्य अध्ययन की नई दिशाएँ’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। संगोष्ठी महर्षि दयानंद सभागार,संस्कृत विभाग में हाइब्रिड माध्यम से होगी।संगोष्ठी में देश के विभिन्न प्रांतों से शोधार्थी एवं अकादमिक संकाय सदस्य प्रतिभाग करेंगे।करीब 150 प्रतिभागी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जुड़कर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे।संगोष्ठी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में भारतीय भाषाओं,रोजगारपरक हिंदी,कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं भाषा प्रौद्योगिकी,शोध एवं नवाचार,डिजिटल मानविकी,भारतीय ज्ञान परंपरा तथा समकालीन साहित्यिक एवं सामाजिक सरोकारों पर विमर्श होगा।आयोजन सचिव डॉ.अजित सिंह तोमर ने बताया कि देश के विभिन्न प्रांतों से करीब 150प्रतिभागी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से संगोष्ठी से जुड़ेंगे और शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे।उन्होंने कहा कि एनईपी-2020 के संदर्भ में हिंदी को तकनीक,रोजगार और समकालीन ज्ञान-विज्ञान से जोड़कर देखने की आवश्यकता है । संगोष्ठी इसी दिशा में सार्थक अकादमिक संवाद का अवसर प्रदान करेगी।शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ.सुहास ने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऐसे अकादमिक आयोजन किए जा रहे हैं।संगोष्ठी से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा शोध की नई दिशाओं को समझने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थी को किताब से मिलने वाले ज्ञान को बेहतर समझने के लिए खेल को चुनना जरूरी है। शैक्षिक एवं तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के कारण उपजे तनाव को कम करने के लिए खेल एक प्राकृतिक एवं संतुलित विकल्प है।
