विशेष खगोलीय व ज्योतिषीय मुर्हत के आधार पर आयोजित होता है कुंभ मेला-अशोक त्रिपाठी
हरिद्वार। श्रीगंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष एवं मेला प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने अर्द्ध कुंभ मेले को कुंभ मेले के रूप में मनाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं।मंगलवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अशोक त्रिपाठी ने कहा कि अर्द्ध्र्रकुंभ को कुंभ घोषित करना धार्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरांओं का उल्लंघन है।धार्मिक ग्रथों में भी कुंभ और अर्द्धकुंभ का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला प्रत्येक 12वर्ष बाद बनने वाले विशेष खगोलीय और ज्योतिषीय मुर्हत के आधार पर आयोजित किया जाता है।अर्द्धकुंभ को कुंभ के रूप में दिव्य व भव्य स्वरूप में आयोजित करने की तैयारियां की जा रही है।कुंभ जैसी अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने से उन्हें कोई ऐतराज नहीं है।अवस्थापना सुविधाएं विकसित करना सरकार और प्रशासन का काम भी है। लेकिन कृत्रिम साधनों से कुंभ के लिए जरूरी खगोलीय व ज्योतिषीय संयोग तथा मुर्हत का निर्माण नहीं किया जा सकता है।समुद्र मंथन जैसी घटनाएं कुंभ के आयोजन से जुड़ी हैं।धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।कुंभ और अर्द्धकुंभ के आयोजन में परिवर्तन का अधिकारी किसी को नहीं है।इसलिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को अर्द्धकुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित करने के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।अशोक त्रिपाठी ने कहा कि अर्द्धकुंभ को कुंभ के रूप में आयोजित करने का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।कुंभ और अर्द्धकुंभ धार्मिक पर्व हैं और हरिद्वार की विश्व में पहचान तीर्थ के रूप में है।लोग गंगा के प्रति श्रद्धा लेकर तीर्थाटन के लिए हरिद्वार आते हैं, पर्यटन के लिए नहीं।हरिद्वार की दिव्यता गंगा जल के प्रवाह से है।कृत्रिम संसाधनों से दिव्यता उत्पन्न नहीं की जा सकती है।उन्होंने कहा कि हरिद्वार के पर्यटन स्थल बनने से अनेक विसंगतियां उत्पन्न होंगी।जिसका सबसे अधिक नुकसान हरिद्वार के पुरोहित समाज और संत समाज को होगा।

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