हरिद्वार। कन्या गुरूकुल के मनोविज्ञान विभाग मे सम्मोहन चिकित्सा पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।मुख्य वक्ता के रूप में मनोवैज्ञानिक सलाहकार निधि कोटियाल व सम्मोहन चिकित्सक ताशू गर्ग नोयडा उत्तर प्रदश से आयी थी।निधि कोटियाल ने कार्यशाला की शुरूआत करते हुये सर्वप्रथम सम्मोहन चिकित्सा का संक्षिप्त इतिहास बताते हुये कहा कि हिप्नोथेरेपी का इतिहास 4000 से अधिक वर्षाे पुराना है,जिसकी जड़े प्राचीन भारत,मिस्त्र और ग्रीस की आध्यात्मिक चिकित्सा प्रणालियों में है प्राचीन भारतीय साधु-सन्तों,तांत्रिको और मिस्त्र के पुजारियों द्वारा मंत्रो वशीकरण और एकाग्रता के माध्यम मे सम्मोहन जैसी अवस्था का उपयोग रोगो के उपचार और चेतना को बदलने के लिए किया जाता था।सिगमंड फाइड ने हिस्टीरिया के इलाज के लिए हिप्नोसिस का इस्तेमाल किया।हिप्नोथेरेपी एक वैज्ञानिक और प्रभावी चिकित्सा पद्धति है जिसका उपयोग दर्द प्रबंधन,चिंता,बुरी आदतों को छोडने और विभिन्न प्रकार के व्यवहार परिवर्तन के लिए किया जाता है।निधि कोटियाल ने बताया कि यह एक सुरक्षित प्रक्रिया है जहां क्लायंट होश मे होता है,लेकिन उसका मन बहुत शांत और सुझावों के प्रति खुला होता है।हिप्नोथेरेपी की प्रक्रिया मे एक प्रशिक्षित थेरेपिस्ट क्लाइंट को गहरी सांस लेने,कल्पना करने और ध्यान केंद्रित करने के निर्देश देकर ट्रान्स की अवस्था में ले जाते हैं।सम्मोहन की अवस्था मे मस्तिष्क तरंगें,गामा तरंगों से बीटा व एल्फा मे बदलती है थीटा तरंगो के दौरान मस्तिष्क सर्वाधिक शांति की अवस्था मे होता है और इस दौरान व्यक्ति में अधिकतम सुझाव ग्रहणशीलता व संवेदनशीलता होती है।थीटा तरंगों की अवस्था मे ट्रांस की गहरी अवस्था होती है इस समय व्यक्ति का मस्तिष्क अधितम सृजनात्मक होता है,नये विचार उत्पन्न होते है।डेल्टा तरंगों की अवस्था गहरी निद्रा की अवस्था होती है।थीटा तरंगो को योग,ध्यान और गहरी सांस लेने के अभ्यास से नियंत्रित किया जा सकता है।सम्मोहन चिकित्सा की शुरुआत गहरी सांसों को लेकर की जाती है जिसमें सांसों पर नियंत्रण रखा जाता है।चिकित्सक विभिन्न प्रकार के सुझाव देकर,डिप्रेशन,चिंता इरिटेबल बावेल सिंड्रोम और कीमोथेरेपी के दर्द को कम करने मे असरदार होता है हिप्नोथेरेपी के संबंध मे लोगों के मन में कई प्रकार की भ्रांतियॉ भी पायी जाती है।हिप्नोथेरेपी कोई जादू नहीं है और न ही व्यक्ति को पूरी तरह से वश मे किया जा सकता है हिप्नोथेरेपी के समय कभी कभी सिरदर्द,चक्कर आना या मानसिक थकान महसूस हो सकता हैै।सम्मोहन चिकित्सक ताशी गर्ग ने छात्राओं को विभिन्न प्रकार की विश्राम तकनीकों की जानकारी दी और इन विश्राम तकनीकी का अभ्यास भी करवाया।छात्राओं ने अपनी उत्सुकता को शांत करने के लिए निधी कोटियाल से कई प्रश्न पूछे।निधी कोटियाल व ताशी गर्ग ने छात्राओं की सभी प्रश्नों का उत्तर सहजता से दिया कार्यशाला का संचालन डा सुनिता रानी डा.ऋचा सक्सेना तथा डा.पारूल मलिक ने किया। कार्यशाला को सफल बनाने मे दीपा साहू,हरिराम व शोध छात्रा मणिका गुप्ता व भव्या अरोड़ा का सहयोग रहा।
